इस शिवरात्रि ऐसे करें भोले को प्रसन्न और करें मनचाही कामना की पूर्ति

इस शिवरात्रि ऐसे करें भोले को प्रसन्न और करें मनचाही कामना की पूर्ति

फागुन माह में आने वाली शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है जिसे महाशिवरात्रि कहा जाता है. इस साल की महाशिवरात्रि फागुन माह की चतुर्दशी तिथि को है जो अंग्...

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फागुन माह में आने वाली शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है जिसे महाशिवरात्रि कहा जाता है. इस साल की महाशिवरात्रि फागुन माह की चतुर्दशी तिथि को है जो अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 13 फरवरी (मंगलवार) को है. शिवरात्रि का पर्व देवाधिदेव महादेव का त्यौहार है और इस दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने से मनचाही मनोकामना पूर्ण होती है, ऐसा विधान है. कहते हैं इस कलियुग में भगवान भोलेनाथ ही ऐसे देव हैं जो बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्त की अभीष्ट इच्छा की पूर्ति करते हैं.

शिवरात्रि के दिन भगवान शिव को खुश करने के लिए प्रेमी भक्तजन व्रत, भजन-कीर्तन और शास्त्र-सम्मत विधि से अपने इष्ट महादेव की पूजा अर्चना करते है. विधिपूर्वक तरीके से पूजन-अर्चन करने से एक ओर जहाँ भगवान जल्दी प्रसन्न होते है वहीँ दूसरी ओर आपकी मनोकामना भी जल्दी पूर्ण होती है. सभी देवी-देवताओं की पूजा विधि लगभग एक समान ही होती है लेकिन पूजा में प्रयुक्त की जाने वाली सामग्री का प्रकार अलग-अलग हो सकता है. इसी तरह भगवान शिव की पूजा में प्रयुक्त की जाने वाली सामग्री में भी विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है.

देवाधिदेव को मनाने के लिए बेलपत्र के अलावा पत्थर बेल भी अर्पित किया जाता है. आक के फूल और धतुरा भी भगवान शिव को अति प्रिय है अत: इनका प्रयोग भी इस दिन शिव पूजा में जरूर करें. भगवान को जल चढाने के लिए लोहे या स्टील के पात्र की बजाये पीतल या ताम्बे के पात्र का उपयोग करें तो बेहतर होगा. इस दिन भगवान की पूजा के लिए चन्दन का इस्तेमाल करें.

शिवरात्रि के दिन शिव की पूजा के लिए हल्दी या कुमकुम या सिन्दूर का प्रयोग भूलकर भी ना करें. भगवान पर या शिवलिंग पर इस दिन लाल फूल का प्रयोग निषेध है इसकी बजाये आप सफ़ेद फूल का इस्तेमाल कर सकते हैं. कहते हैं कि शिवलिंग पर शंख से जल कदापि नहीं चढ़ाना चाहिए. और हां, इस दिन तुलसी का प्रयोग बिल्कुल भी ना करें, भगवान पर तुलसी पत्र का प्रयोग करना वर्जित है.

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