होली विशेष: आपको विरासत में मिली है इतनी कीमती धरोहर, सुरक्षित तरीके से खेलकर बनायें यादगार

होली विशेष: आपको विरासत में मिली है इतनी कीमती धरोहर, सुरक्षित तरीके से खेलकर बनायें यादगार

भारत के प्रमुख त्यौहारों में से एक है होली. हिन्दू पंचांग के अनुसार फागुन माह की पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला होली का पर्व अंग्रेजी कैलेंडर के मार्...

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भारत के प्रमुख त्यौहारों में से एक है होली. हिन्दू पंचांग के अनुसार फागुन माह की पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला होली का पर्व अंग्रेजी कैलेंडर के मार्च महीने की 2 तारीख को मनाया जायेगा. होली का पर्व वसंत ऋतु का प्रतीक है और इसे रंगों का त्यौहार भी कहा जाता है. भारतवर्ष के सभी राज्यों में उत्साह और उल्लास के साथ मनाये जाने वाले होली के पर्व को मनाने के तौर-तरीके भी देश के सभी भागों में अलग-अलग है.

आपसी वैर-भाव को भुलाकर भाईचारे और सौहार्द का प्रतीक ये होली का त्यौहार समाज को एक सूत्र में पिरोकर हमें आपसी प्रेम और खुशियों में मिलकर रहने की प्रेरणा देता है. इस पर्व पर हमें अपनी आपसी दुश्मनी और नाराजगी को भुलाकर सभी से प्रेमपूर्वक होली खेलनी है. भगवान ने आपको रंग खेलने का मौका दिया है तो इसे सुरक्षित तरीके से खेलिए ताकि आपके लिए इस त्यौहार की खुशियाँ दुगुनी हो जाये.

हमेशा याद रखिये कि हमें ये जो आपसी भाईचारे के प्रतीक के रूप में जो त्यौहार विरासत में मिले हैं उन्हें आधुनिकता की दौड़ में हम इन्हें महज पानी की बर्बादी या पैसों की बर्बादी के त्यौहार मानने लगेंगे तो एक दिन ऐसा आएगा कि धीरे-धीरे हम इन त्यौहारों से दूर होते जायेंगे. ऐसे में हमसे हमारी आने वाली पीढियां जवाब मांगेगी. इन त्यौहारों को किसी ख़ास उद्देश्य से ही बनाया गया है. वैज्ञानिक दृष्टि से भी इन्हें महत्वपूर्ण माना गया है.

हम आपको नहीं कहते कि होली पर रंग मत खेलिए, हम नहीं कहेंगे कि आप गुलाल मत खेलिए और ना ही हम आपको पानी बचाने की नसीहत देंगे. होली खेलिए जरूर खेलिए, बच्चे बनकर खेलिए, बच्चों के साथ मिलकर खेलिए लेकिन ऐसी होली खेलना कि हर कोई आपके साथ खेलने को तरसे. तो हो जाइये तैयार सुरक्षित तरीके से होली खेलने के लिए ताकि इसे यादगार बनाया जाये और इस अनमोल धरोहर को संजो कर रखिये ताकि जैसा समाज में आपका भाईचारा और प्रेम बना हुआ है वैसा ही हम आने वाली अपनी संतानों को दे सकें वरना जैसे आधुनिकता की दौड़ में हम आपसी संबंधों को भूलते जा रहे हैं अगर वैसा ही चलता रहा तो इस प्रकार के त्यौहार सिर्फ किताबों में या इतिहास की बातें हो जायेंगे.

 

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