खतरे में LIC, सरकार के इस कदम से डूब सकती है LIC की नैय्या और लोगों की बीमा की रकम

खतरे में LIC, सरकार के इस कदम से डूब सकती है LIC की नैय्या और लोगों की बीमा की रकम

देश में सर्वाधिक विश्वनीय मानी जाने वाली बीमा कंपनी LIC में अधिकांश लोगों की खून-पसीने की गाढ़ी कमाई जमा है. प्रतिवर्ष करोड़ों लोग LIC में नई पालिसी खरी...

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देश में सर्वाधिक विश्वनीय मानी जाने वाली बीमा कंपनी LIC में अधिकांश लोगों की खून-पसीने की गाढ़ी कमाई जमा है. प्रतिवर्ष करोड़ों लोग LIC में नई पालिसी खरीदते हैं और अरबों रूपए के रूप में प्रीमियम भरते हैं. क्योंकि LIC, एक सर्वाधिक विश्वनीय और भरोसेमंद कंपनी है जिस पर आमजन का भरोसा कायम है. लेकिन सरकार के एक फैसले से LIC पर संकट के बादल छाने लगे हैं.

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हाल ही में केंद्र सरकार ने देश के कुछ बैंकों को एनपीए से मुक्त कराने के लिए 2.1 लाख करोड़ रुपये के रीकैपेटलाइजेशन प्रोग्राम को मंजूरी दी. वहीं अब सरकार ने सर्वाधिक एनपीए अनुपात वाले IDBI  बैंक को देश की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के हवाले करने का प्लान किया हुआ है. इसका सीधा मतलब है की लोगों का LIC को हर वर्ष पालिसी के लिए बतौर प्रीमियम जमा किया जाने वाला पैसा अब IDBI को डूबने से बचाने में यूज़ किया जायेगा.

एक प्रतिष्ठित न्यूज़ पेपर पर छपी खबर के अनुसार यह फैसला LIC के ग्राहकों के हित में तो बिलकुल भी नहीं है. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा है की क्या सरकार इस बात की गारंटी देती है की इससे IDBI की एनपीए की समस्या दूर हो जाएगी? और अंत में क्या इस फैसले से एलआईसी के ग्राहकों का उनके जीवनकाल का सबसे बड़ा निवेश सुरक्षित रहेगा?

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वर्तमान में IDBI बैंक में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत है. इसी साल के शुरू में सरकार ने अपने रीकैपिटलाइजेशन प्रोग्राम के तहत बैंक की मदद करने के लिए 10,610 करोड़ रुपये डाला है और सबसे अधिक एनपीए अनुपात वाला बैंक IDBI ही है. एक्सपर्ट के मुताबिक खुद बैंक की भूमिका में आ जाने के बाद LIC के सामने भी वही चुनौती होगी जो इससे पहले कर्ज़ बांटकर सरकारी बैंकों की हो चुकी है. वहीं इस बात की भी कोई तसल्ली नहीं है कि LIC के पास स्वतंत्र रूप से बैंक चलाने की क्षमता भी है और वह जनता के पैसे को सुरक्षित रखने में किसी अन्य सरकारी बैंक से ज्यादा सक्षम है.

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