आधी ख़ुशी आधा गम, जानिये आम बजट में कितना है दम

आधी ख़ुशी आधा गम, जानिये आम बजट में कितना है दम

मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल का आखिरी और वित्तमंत्री अरुण जेटली ने अपना आखिरी बजट पेश कर दिया है. इस बजट को लेकर केन्द्र सरकार के मंत्रियों, बीजेपी नेत...

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मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल का आखिरी और वित्तमंत्री अरुण जेटली ने अपना आखिरी बजट पेश कर दिया है. इस बजट को लेकर केन्द्र सरकार के मंत्रियों, बीजेपी नेताओं और विपक्षी दलों के नेताओं ने अलग-अलग प्रतिक्रिया की है. एक ओर जहाँ इसे बीजेपी के नेताओं ने क्रांतिकारी और हर वर्ग का ख्याल रखने वाला बजट बताया वहीँ दूसरी ओर विपक्षी दलों ने इसे सिरे से ख़ारिज करते हुए एक ‘जुमला बजट’, ‘विफल बजट’ और ‘पकौड़ा बजट’ तक कह डाला है.

वित्त मंत्री ने अपने पूर्णकालिक बजट में गरीबों, किसानों और ग्रामीणों का ख़ास ख्याल रखते हुए इनके लिए सरकारी खजाने के द्वार खोल दिए हैं तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और छोटे उद्योगों और कारोबारियों के लिए भारी भरकम रकम आवंटित करने की घोषणा की. वहीँ इस बजट ने मिडिल क्लास के सपनों को ध्वस्त करते हुए उन्हें सिर्फ मायूसी ही दी है. मिडिल क्लास ने इस मोर्चे पर बहुत सी उम्मीदें पाल राखी थी उन्हें ना ही तो आयकर छूट सीमा में राहत दी गयी है ना ही GST व इनकम टैक्स की दरों और स्लैब में कोई बदलाव किया गया.

आइये जानते है इस बजट से किसे मिली ख़ुशी और किसके हाथ आई निराशा:

इस बजट में देश के आत्महत्या करते किसानों के लिए सरकार आशा की किरण लेकर आई है. देश के किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हेतु खरीफ की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 1.5 गुणा तक की बढौतरी की घोषणा की है. सरकार अगले साल तक देश की गरीब महिलाओं को उज्ज्वला योजना के तहत 8 करोड़ घरेलु गैस कनेक्शन देगी. नौकरी पेशा लोगो और बड़े कारोबारियों को सालाना 40,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन घोषणा की है.

शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर लगने वाले सेस को 3 फीसदी से बढाकर 4 फीसदी किया गया है. शेयर बाज़ार में एक लाख से ज्यादा कमाई पर आपको पर टैक्स देना होगा. सरकार ने कहा है कि प्रत्येक तीन में से एक  संसदीय इलाकों में एक मेडिकल कॉलेज खोला जायेगा. आदिवासी इलाके के लोगों को शिक्षा से मुख्यधारा में जोड़ने हेतु एकलव्य स्कूल खोले जायेंगे. इस बजट में जेटली ने बुजुर्गों का खास ख्याल रखते हुए उन्हें पचास हज़ार तक के ब्याज पर टैक्स में छूट का एलान किया है. कुल मिलकर इस बजट के बारे में कह सकते हैं कि सरकार ने निम्न तबके और लघु उद्योगों और छोटे व्यापारियों के लिए खजाने के भण्डार खोल दिए हैं वहीँ मध्यम वर्गीय और नौकरीपेशा लोगों को इस बजट से निराशा ही हाथ लगी है.

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