दिवाली का मतलब ही धूम धड़ाका, पटाखों और बम्ब पटाखों का कान फोडू धमाका, आतिशबाजी की रंग बिरंगी फुहारों से चमकता आसमान, जो बच्चों और बड़ो के लिए ही नहीं सभी के लिए आनंद और उत्साह का त्यौहार है. लेकिन इस बार ये सब आपको फीका नज़र आयेगा.

अब जबकि दिवाली आने में कुछ ही समय शेष है और अधिकतर बच्चो के लिए और बडो के लिए दिवाली मतलब सिर्फ पटाखे जलाना ही होता है, वो खूब पटाखे जलाने की उम्मीद में महीनो पहले ही इसके लिए तैयारी करने में लग जाते है. लेकिन इस बार लगता है दिल्ली और एनसीआर वालो को ये दिवाली बिना पटाखों के ही मनानी पड़ेगी, क्योंकि दिल्ली सहित एनसीआर में पटाखों को बेचने और उनका स्टॉक करने पर भी प्रतिबन्ध लगा दिया गया है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने निचले कोर्ट के आदेश को जारी रखते हुए 1 नवम्बर 2017 तक दिल्ली के समस्त पटाखा विक्रेताओं के लाइसेंस रद्द कर दिए है. यानि अब न तो वो पटाखे बेच पाएंगे न ही उनका स्टॉक कर पायेंगे. पहले जब छोटे मोटे किराना के दुकानदार के पास भी मिल जाने वाले पटाखे अब दिल्ली के लोगों के लिए दुर्लभ हो जायेंगे. इस कारण से अब दिल्ली वालो की दिवाली बिन पटाखों के ही गुजरने वाली है.

दरअसल हर साल दिवाली पर रात भर में इतना ज्यादा प्रदूषण होता है जिससे सांस के लिए मिलने वाली ऑक्सीजन इतनी विषैली हो जाती है की खतरे का निशान निर्धारित रिकॉर्ड तोड़कर ऊपर तक जा पहुँचता है, इस बात को मद्देनज़र रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए निचले कोर्ट के आदेश को जरी रखा है. कोर्ट ने प्रदूषण का हवाला देते हुए कहा कि ये अपने आप में बहुत ही चिंतनीय बात है क्योंकि एक रात में होने वाला ये प्रदूषण राजधानी को कई महीनो तक दिक्कत देता है इस वजह से सर्दियों में कोहरा भी दिल्ली में इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि लोगो को सांस लेने में भी दिक्कते आने लगती है तो इसका निस्तारण एक तरीके से ये निकाला गया है.इस बाबत जहाँ एक तरफ लोगों में निराशा है वहीँ पर्यावरण समर्थकों के एक बड़े तबके के लिए ये एक बहुत बड़ी ख़ुशी की बात है.