नोटबंदी के बाद मोदी सरकार का दूसरा बड़ा झटका, बंद हो सकता है चेक से लेनदेन

नोटबंदी के बाद मोदी सरकार का दूसरा बड़ा झटका, बंद हो सकता है चेक से लेनदेन

कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देने को लेकर सरकार द्वारा पिछले साल की गयी नोटबंदी और उसके बाद से ही सरकार की लगातार कोशिश रही है की देशभर में नगद लेनदेन को क...

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कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देने को लेकर सरकार द्वारा पिछले साल की गयी नोटबंदी और उसके बाद से ही सरकार की लगातार कोशिश रही है की देशभर में नगद लेनदेन को कम किया जाये, ताकि भ्रष्टाचार और कालेधन जैसे गंभीर अपराधों पर रोक लग सके. इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार जल्द ही सरकारी बैंकों में मिलने वाली चेक सुविधा को भी बंद कर सकती है.

CAIT यानि फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के अनुसार मोदी सरकार जल्द ही चेक व्यवस्था को बंद करने जैसा बड़ा आदेश जारी कर सकती है. सरकार का प्रयास है की क्रेडिट और डेबिट कार्ड्स का अधिक से अधिक इस्तेमाल किया जाये. केंद्र सरकार इसे अधिक सुचारू और जनप्रिय बनाने के चेकबुक सुविधा को भी बंद कर सकती है.

संगठन के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल के मुताबिक नोटबंदी से पहले सरकार को नए नोटों की छपाई पर लगभग 25 हज़ार करोड़ का खर्चा करना पड़ता था. इसके अलावा 5 हज़ार से भी ज्यादा रूपए उनकी सुरक्षा पर खर्च करना पड़ता था. जब खंडेलवाल से पूछा गया की, “चेक की सुविधा को खत्म करने से कैशलेस अर्थव्यवस्था की दिशा में कितना लाभ होगा?” तो इसके जवाब में उन्होंने कहा की व्यापारिक लेनदेन के मामलों में अधिकतर लेनदेन चेक के जरिये ही होते है. उन्होंने आगे कहा की देश में 90 प्रतिशत से ज्यादा लेनदेन या तो नगद होते है या फिर चेक के माध्यम से. जब से नोटबंदी हुई है तब से नगदी के लेनदेन में कमी आई है तो निश्चित ही चेकों का इस्तेमाल भी बढ़ा है.

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