पैट्रोल- डीजल को जीएसटी के दायरे में लाना अभी दूर की कौड़ी, ये है प्रमुख वजह

पैट्रोल- डीजल को जीएसटी के दायरे में लाना अभी दूर की कौड़ी, ये है प्रमुख वजह

पैट्रोल- डीजल की आसमान छूती कीमतों से त्रस्त आम आदमी को फिलहाल राहत मिलती नज़र नहीं आ रही है. GST परिषद की गुरूवार को हुई बैठक में कयास लगाए जा रहे थे ...

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पैट्रोल- डीजल की आसमान छूती कीमतों से त्रस्त आम आदमी को फिलहाल राहत मिलती नज़र नहीं आ रही है. GST परिषद की गुरूवार को हुई बैठक में कयास लगाए जा रहे थे कि पैट्रोल -डीजल को GST के दायरे में लाने के बारे में परिषद कोई बड़ा फैसला लेने वाली है. लेकिन फिलहाल इस मोर्चे पर कोई फैसला नहीं लिया जा सका.

पैट्रोल और डीजल को GST के दायरे में लाने में सबसे बड़ा पेंच सभी राज्यों का इस मामले में सहमत नहीं होना है, इसका ख़ास कारण है राज्य को पैट्रोल और डीजल पर मिलने वाला राजस्व. राज्य सरकार को पैट्रोल और डीजल की बिक्री पर वैट के जरिये काफी ज्यादा राजस्व मिलता है और यही राज्य सरकार की आय का प्रमुख स्रोत है.

एक अनुमान के मुताबिक इन्हें GST के दायरे में लाने के बाद पैट्रोल की कीमत पचास रूपए से भी कम हो जाएगी. क्योंकि GST के बाद इन पर केंद्र सरकार की तरफ से लगनी वाली एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकार द्वारा लगाया वैट दोनों ख़त्म हो जायेगा. नियमानुसार GST के अंतर्गत अधिकतम 28 प्रतिशत की दर से टैक्स लगाया जा सकेगा तब भी इनकी मौजूदा कीमतों में 35 से 40 प्रतिशत तक की कटौती संभव है.

आपको बता दें कि पैट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होने की वजह से आम उपभोक्ता त्राहि-त्राहि कर रहा है. शुक्रवार को मुंबई में पैट्रोल की कीमत 79.58 प्रति लीटर तक पहुँच गई है. इस बढौतरी के बाद से उम्मीद लगाई जा रही थी कि पैट्रोल और डीजल को GST के दायरे में लाया जायेगा. परन्तु राज्य सरकारों द्वारा राजस्व के घाटे को देखते हुए इसके लिए सहमती में समय लग रहा है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि कांग्रेस समेत लगभग सभी पार्टियाँ इन्हें GST में लाने के लिए सहमत है तो आशा है कि जीएसटी परिषद् की आगामी बैठक में इस बारे में कोई फैसला हो सकता है.

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