क्लर्क की मामूली चूक- लिखना भुल गया ये दो शब्द, अब 42 साल बाद तीसरी पीढ़ी को मिला न्याय

क्लर्क की मामूली चूक- लिखना भुल गया ये दो शब्द, अब 42 साल बाद तीसरी पीढ़ी को मिला न्याय

गुरूवार को मिर्जापुर में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया. एक क्लर्क की मामूली चूक से पीड़ित को न्याय मिलने में 42 साल लग गए. महज 312 रूपए के एक मुकदमे के ...

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गुरूवार को मिर्जापुर में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया. एक क्लर्क की मामूली चूक से पीड़ित को न्याय मिलने में 42 साल लग गए. महज 312 रूपए के एक मुकदमे के निस्तारण होने में पीड़ित की दो पीढ़ियाँ गुजर गई. इस दौरान तीन पीढ़ियों ने कोर्ट के चक्कर काटे और मुकदमा लड़ा.न्याय

क्या था मामला

दरअसल, मिर्ज़ापुर डिवीजन कोर्ट में साल 1977 से 312 रूपये का मुकदमा चल रहा था. साल 1975 में घर कि कुर्की हो जाने के बाद कोर्ट में मुकदमा दायर करने पर कोर्ट फीस के तौर पर पीड़िता गंगा देवी को 312 रूपये जमा करना था. पैसा जमा करने के बाद भी क्लर्क की गलती के चलते कोर्ट के पत्रावली में पैसा नहीं चढ़ पाया. इस दौरान पिछले 42 साल में किसी जज का ध्यान क्लर्क की गलती पर नहीं गया. लेकिन मुकदमों की पेंडेंसी देखने के दौरान सीनियर डिवीजन कोर्ट के जज लवली जायसवाल की नजर मामले पर पड़ी. इसके बाद उन्होंने केस का निस्तारण किया.

प्राप्त जानकारी के अनुसार केस दायर करने वाली महिला की कई साल पहले ही मौत हो गई. उसके बाद सालों तक पीडिता का पुत्र न्याय के लिए दर-दर भटकता रहा लेकिन फिर उसकी भी मौत हो गई. इस दौरान डिविजन कोर्ट में तक़रीबन 11 जज तबादला होकर आये और चले गए. सभी के आगे न्याय की फ़रियाद की गई लेकिन न्याय नहीं मिला, मिली तो सिर्फ तारीख. फिलहाल उसकी तीसरी पीढ़ी के पौत्र को कोर्ट के आदेश की जानकारी दी गई. इसके बाद उसने राहत की सांस ली.न्याय

आपको बता दें की 1977 में फीस जमा करवाने के बाद भी पीड़ित गंगा देवी न्याय के लिए भटकती रही और 1998 में उसकी मृत्यु हो गई. उसके बाद उनके बेटे मंगल तिवारी मुकदमे को देखने लगे. लेकिन मां की मौत के 10 साल बाद मंगल तिवारी की भी मृत्यु हो गई. मंगल की मौत के बाद उनके पांच पौत्र ने केस को आगे बढ़ाया.

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