सोमवार को है मौनी अमावस्या, 71 सालों बाद इस बार बन रहा है दुर्लभ महायोग

सोमवार को है मौनी अमावस्या, 71 सालों बाद इस बार बन रहा है दुर्लभ महायोग

मौनी अमावस्या को सबसे बड़ी अमावस्या माना गया है और सनातन धर्म में मौनी अमावस्या का खास महत्व भी है. माना जाता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और द...

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मौनी अमावस्या को सबसे बड़ी अमावस्या माना गया है और सनातन धर्म में मौनी अमावस्या का खास महत्व भी है. माना जाता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान से अक्षय पूण्य की प्राप्ति होती है. शिव महापुराण के अनुसार जो भी मनुष्य इस दिन गंगा, यमुना और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करके सच्चे मन से दान करता है उस पर समस्त ग्रह-नक्षत्रों की कृपा बनी रहती है. ऐसे में 4 फरवरी को ही कुंभ मेले के तीसरे शाही स्नान का योग होने के कारण इस बार मौनी अमावस्या का महत्व और भी बढ़ गया है. यही नहीं इस बार मौनी अमावस्या सोमवार को पड़ रही है, जिसके चलते सोमवती और मौनी अमावस्या का महायोग बन रहा है.mauni amavsya ke sanyog

इस सोमवार को मौनी अमावस्या पर शाही स्नान का दुर्लभ संयोग पुरे 71 सालों बाद बन रहा है जिसके चलते संगम पर स्नान करने वालों की संख्या में भारी इजाफा देखने को मिल सकता है, उम्मीद है की इस अमावस्या को करीब चार करोड़ श्रद्धालु संगम में डुबकी लगायेंगे. मान्यता है की इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में मौन रहकर डुबकी लगाने से अनंत गुणा फल की प्राप्ति होती है. आपको बता दें कि रविवार रात 2.27 बजे से 4.57 तक श्रवण नक्षत्र है. ऐसे में इस मुहूर्त में स्नान करना सर्वार्थ अमृत सिद्धि योग सर्वप्रकार से अमृततुल्य है. कहा जाता है की इस दिन स्वर्ग से स्वयं देवतागण भी संगम में स्नान करने आते हैं.

धर्म ग्रंथों के अनुसार जब सागर मंथन से भगवान धन्वन्तरि अमृत कलश लेकर निकले तो देवताओं और राक्षसों की लड़ाई की वजह से अमृत कलश से अमृत छलक गया और उसकी कुछ बूंदे संगम में गिर गई, इसलिए नदी स्नान से अमृत प्राप्त होता है जो ग्रह कष्ट निवारण में सहायक होता है. इसके अलावा एक अन्य मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान मनु का भी जन्म हुआ था. इस व्रत को मौन धारण करके व यमुना या गंगा में स्नान करके समापन करने वाले को मुनि पद की प्राप्ति होती है. चंद्रमा मन के स्वामी हैं पर अमावस्या को चंद्र दर्शन नहीं होने से मन कमजोर होता है. अतः मौन रखकर मन को संयम में रखने और मानसिक जाप करने से मन शांत रहता है. जिससे जीवन में भी शांति बनी रहती है.mauni amavsya ke sanyog

मौनी अमावस्या को सुबह जल्दी उठकर सूर्योदय से पहले पानी में गंगाजल डालकर मौन रहकर स्नान करें. इसके बाद एक आसन पर पूर्व दिशा की तरफ मुंह करके बैठें औऱ तांबे के लोटे में गंगाजल भरकर रखें. रुद्राक्ष की माला के साथ गायत्री मंत्र का जाप करें और लोटे में रखे गंगाजल का घर के सभी कोनों पर छिड़काव करें. इससे घर में मौजूद नकारात्मकता दूर होगी और परिवार के सभी लोगों के स्वास्थ्य में लाभ होगा. अगर कोई बीमार व्यक्ति है तो उसे इस जल का सेवन जरूर कराएं. इसके बाद गरीबों को भोजन कराएं और दान दें.

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