जानिए पुराणों ने अनुसार महाशिवरात्रि व्रत की कथा और पूजन का शुभ मुहूर्त

जानिए पुराणों ने अनुसार महाशिवरात्रि व्रत की कथा और पूजन का शुभ मुहूर्त

वैसे तो साल के हर महीने की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि आती है लेकिन फागुन माह में आने वाली शिवरात्रि को महा शिवरात्रि कहा जाता है. यह भगवान शिव को समर्...

MahaShivratri 2019: सोमवार को है महाशिवरात्रि, जानिये इस बार क्यों बहुत ख़ास है ये दिन
शिवरात्रि विशेष: मुहूर्त को लेकर भ्रम में ना पड़ें- ये है व्रत, पूजा और मुहूर्त की जानकारी
जानिए क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि, इसका महत्व और व्रत के नियम

वैसे तो साल के हर महीने की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि आती है लेकिन फागुन माह में आने वाली शिवरात्रि को महा शिवरात्रि कहा जाता है. यह भगवान शिव को समर्पित त्यौहार है जिसे भारतवर्ष में बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है. महाशिवरात्रि के दिन भक्तजन देवाधिदेव महादेव का व्रत और ओउजन करते है और रात्रि जागरण किया जाता है. महाशिवरात्रि को लेकर एक नहीं बल्कि हिंदू पुराणों में जो कथा प्रचलित हैं. आइये जानते है महा शिवरात्रि की ये ख़ास कथा.

कहते हैं कि एक बार भगवान शिव ने माता पार्वती को सबसे सरल व्रत-पूजन का उदाहरण देते हुए एक शिकारी की कथा सुनाई. भगवान शिव द्वारा बताई गई कथा के अनुसार एक शिकारी था जिसका नाम था चित्रभानु. वो शिकार करके ही परिवार का पालन-पोषण करता था. उस पर एक साहूकार का ऋण था, जिसे समय पर ना चुकाने की वजह से एक दिन साहूकार ने शिकारी को शिवमठ में बंदी बना लिया था. जिस दिन उसे बंदी बनाकर वहां रखा गया उस दिन शिवरात्रि थी. शिवमठ में शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना और कथा सनाई जा रही थी, जिसे वो बंदी शिकारी भी सुन रहा था. दिन ढ़लते ही वो साहूकार उस शिकारी के पास फिर आया और कर्ज़ के बारे में पूछा. शिकारी ने थोड़े समय की मोहलत मांगी और साहूकार ने उसे रिहा कर दिया.Maha Shivratri vart katha

अगले दिन शिकारी एक बार फिर शिकार पर निकला. इस बीच उसे बेल का पेड़ दिखा. रात से भूखा शिकारी बेल पत्थर तोड़ने का रास्ता बनाने लगा. इस दौरान उसे मालूम नहीं था कि पेड़ के नीचे शिवलिंग बना हुआ है जो बेल के पत्थरों से ढका हुआ था. शिकार के लिए बैठने की जगह बनाने के लिए वो टहनियां तोड़ने लगा, जो संयोगवश शिवलिंग पर जा गिरीं. इस प्रकार दिनभर भूखे-प्यासे शिकारी का व्रत भी हो गया और शिवलिंग पर बेलपत्र भी चढ़ गए.

जब उसने शिकार के लिए जगह तैयार कर ली और घात लागाकर बैठ गया तो उसी दौरान उस पेड़ के पास से एक-एक कर तीन मृगी (हिरणी) गुज़रीं. पहली हिरणी गर्भ से थी,जैसे ही शिकारी ने उसे मारने के लिए हथियार उठाये तो उस हिरणी ने शिकारी से कहा की मैं गर्भिणी हूँ और जैसे ही मैं प्रसव कर लुंगी खुद ही आपके समक्ष आ जाउंगी. शिकारी मान गया. इसी तरह दूसरी मृग ने भी कहा कि वो अपने प्रिय को खोज रही है. जैसे ही उसके उसका प्रिय मिल जाएगा वो खुद ही शिकारी के पास आ जाएगी. इसी तरह तीसरी मृग भी अपने बच्चों के साथ जंगलों में आई. उसने भी शिकारी से उसे ना मारने को कहा. वो बोली कि अपने बच्चों को इनके पिता के पास छोड़कर वो वापस शिकारी के पास आ जाएगी.Maha Shivratri vart katha

इस तरह शिकारी को तीनों हिरणीयों पर दया आ गई और उन्हें छोड़ दिया, लेकिन शिकारी को अपने बच्चों की याद आई कि वो भी उसकी प्रतिक्षा कर रहे हैं. तब उसके फैसला किया वो इस बार वो किसी पर दया नही करेगा. इस बार उसे मृग दिखा. जैसे ही शिकारी ने धनुष की प्रत्यंचा खींची मृग बोला – यदि तुमने मुझसे पूर्व आने वाली तीन मृगियों और छोटे-छोटे बच्चों को मार डाला है, तो मुझे भी मारने में विलंब न करो, ताकि मुझे उनके वियोग में एक क्षण भी दुःख न सहना पड़े. मैं उन मृगियों का पति हूं. यदि तुमने उन्हें जीवनदान दिया है तो मुझे भी कुछ क्षण का जीवन देने की कृपा करो. मैं उनसे मिलकर तुम्हारे समक्ष उपस्थित हो जाऊंगा.

ये सारा घटनाक्रम शिकारी के आँखों के आगे आ गया और उसने अपना धनुष छोड़ा और पूरी कहानी मृग को सुनाई. पूरे दिन से भूखा, रात की शिव कथा और शिवलिंग पर बेल पत्र चढ़ाने के बाद शिकारी का हिंसक हृदय निर्मल हो गया. उसमें भगवद् शक्ति का वास हुआ. थोड़ी ही देर बाद वह मृग सपरिवार शिकारी के समक्ष उपस्थित हो गया, ताकि वह उनका शिकार कर सके. लेकिन जंगली पशुओं की ऐसी सत्यता, सात्विकता और प्रेमभावना देखकर शिकारी को बड़ी ग्लानि हुई.Maha Shivratri vart katha

शिकारी ने मृग के परिवार को न मारकर अपने कठोर हृदय को जीव हिंसा से हटा सदा के लिए कोमल एवं दयालु बना लिया. देवलोक से समस्त देव समाज भी इस घटना को देख रहे थे. इस घटना के बाद शिकारी और पूरे मृग परिवार को मोक्ष की प्राप्ति हुई.

इस बार महाशिवरात्रि का त्यौहार 4 मार्च को पड़ रहा है शुभ मुहूर्त सोमवार शाम 04:28 बजे से शुरू होकर मंगलवार सुबह (5 मार्च 2019) 07:07 बजे तक रहेगा.

सभी भक्त जनों पर भगवान भोलेनाथ की कृपा सदा बनी रहे, इन्ही दुआओं के साथ आपसे मुलाकात करेंगे अगली पोस्ट में. आशा है आपको हमारी ये जानकारी पसंद आई होगी. सभी भक्तजन कमेन्ट बॉक्स में लिखें- हर हर महादेव.