आओ वास्तु सीखें -भाग 2: वास्तु के अनुसार दिशाओं का ज्ञान और उनका महत्व

आओ वास्तु सीखें -भाग 2: वास्तु के अनुसार दिशाओं का ज्ञान और उनका महत्व

आज के समय में भवन निर्माण के लिए या फिर सुख सुविधाओं से भरपूर जीवन यापन के लिए वास्तु के अनुरूप घर, मकान, दूकान या फेक्टरी बनाना अति आवश्यक है. लेकिन ...

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आज के समय में भवन निर्माण के लिए या फिर सुख सुविधाओं से भरपूर जीवन यापन के लिए वास्तु के अनुरूप घर, मकान, दूकान या फेक्टरी बनाना अति आवश्यक है. लेकिन वास्तु का ज्ञान नहीं होने के कारण हम इसका सही लाभ नहीं उठा पाते हैं.

इसलिए इसकी आवश्यकता को देखते हुए हमने आपके लिए वास्तु का एक कोर्स (आओ वास्तु सीखें) शुरू किया जिसमें आप थोड़ी सी मेहनत करके मात्र तीन महीनों में ही वास्तु के एक्सपर्ट बन सकते हैं. हमारा प्रयास है की सभी को वास्तु के विषय में पर्याप्त जानकारी मिल सके और अपनी समस्याओं के सामाधान के लिए किसी को कहीं ओर भटकना नहीं पड़े. इसलिए आप नियमित हमारी साईट पर विजिट करते रहें और हमारे कोर्स ‘आओ वास्तु सीखें का ध्यान पूर्वक अध्ययन करें. ‘आओ वास्तु सीखें’ के ध्यानपूर्वक अध्ययन से आप जल्दी ही इसमें पारंगत हो जायेंगे, ऐसा हमारा विश्वास है.vastu me dishaon ka mahtav

वास्तु में दिशाओं के बहुत महत्व है या यूँ कहें कि दिशाएँ वास्तु का आधार है. वैसे तो हम सभी जानते हैं कि पुर्व, पश्चिम, उत्तर और  दक्षिण ये चार दिशाएँ होती है. लेकिन वास्तु शास्त्र के हिसाब से दिशाएँ 10 होती है. जो पुर्व, पश्चिम, उत्तर और  दक्षिण के अलावा पुर्व व उत्तर के मध्य में होता है ईशान कोण, जबकि दक्षिण व पुर्व के मध्य में अग्निकोण तो दक्षिण व पश्चिम के मध्य नैऋत्य कोण होता है जबकि उत्तर व पश्चिम के मध्य वायव्य कोण कहलाता है. इसके बाद एक आकाश और दुसरी होती है पाताल.

इस प्रकार भवन, मकान या दुकान के लिए कोई भी निर्माण करते समय इन दस दिशाओं को ध्यान में रखते हुऐ प्लानिंग करनी चाहिए. अक्सर लोगों को ये कन्फ़्यूजन रहता है की किसी भवन की सही दिशा कौन सी है?  हम जब भवन के बाहर से अन्दर जाते है उस समय हमारा मुँह जिस दिशा में होता है उसको माने या किसी घर से बाहर आते समय हमारा मुँह जिस दिशा में होता है उसको सही माने?

इसका निर्धारण करने के लिए सबसे पहले ये जान लें की भवन अपने आप में एक पुरूष है और जिस दिशा में इस पुरूष का मुख है अर्थात मुख्य द्वार है वही इसकी सही दिशा है. अर्थात आप जब घर से बाहर निकल रहे हैं और जिस दिशा में आपका मुँह होता है वही उस भवन की दिशा माननी चाहिए.

जब भुमि (घर या प्लाट) की दिशाएँ देखनी हो तो उसके मध्य मैं कम्पास (दिशा सूचक) रखें. जब निर्माण की देखनी हो तो पुरे निर्माण के मध्य कम्पास रखें या फिर जब किसी कमरे की दिशाओं का निर्धारण करना हों तो उस कमरे के मध्य में कम्पास रखकर आप बड़ी आसानी से उस कमरे की दिशाओं का पता लगा सकते हैं.vastu me dishaon ka mahtav

नोट- आजकल कम्पास हर मोबाइल में होता है अगर आपके पास नही है तो आप डाउनलोड कर लें या बाज़ार में स्टैशनरी की दुकान से ख़रीद लें.

तो मित्रों, आपको हमारी ये ‘आओ वास्तु सीखें’ की क्लास कैसी लग रही है? अगर आपको ये पोस्ट पसंद आई हो तो हमें लाइक करें और इस पोस्ट को शेयर जरुर जरें ताकि अधिक से अधिक लोग इसका फायदा उठा सकें.