आओ वास्तु सीखें-3: प्राकृतिक शक्तियों के संतुलन से अपने भाग्य के निर्माता स्वयं बने

आओ वास्तु सीखें-3: प्राकृतिक शक्तियों के संतुलन से अपने भाग्य के निर्माता स्वयं बने

आज के समय में भवन निर्माण के लिए या फिर सुख सुविधाओं से भरपूर जीवन यापन के लिए वास्तु के अनुरूप घर, मकान, दूकान या फेक्टरी बनाना अति आवश्यक है. लेकिन ...

आओ वास्तु सीखें (How to Learn Vastu)-1: वास्तु के अनुसार किस दिशा में कौन सा तत्व होना चाहिए
आओ वास्तु सीखें-5: किस दिशा में कितनी जगह छोड़कर घर बनायें और इसके वास्तु दोष दूर करने के उपाय
आओ वास्तु सीखें -भाग 2: वास्तु के अनुसार दिशाओं का ज्ञान और उनका महत्व

आज के समय में भवन निर्माण के लिए या फिर सुख सुविधाओं से भरपूर जीवन यापन के लिए वास्तु के अनुरूप घर, मकान, दूकान या फेक्टरी बनाना अति आवश्यक है. लेकिन वास्तु का ज्ञान नहीं होने के कारण हम इसका सही लाभ नहीं उठा पाते हैं.

इसलिए इसकी आवश्यकता को देखते हुए हमने आपके लिए वास्तु का एक कोर्स (आओ वास्तु सीखें) शुरू किया जिसमें आप थोड़ी सी मेहनत करके मात्र तीन महीनों में ही वास्तु के एक्सपर्ट बन सकते हैं. हमारा प्रयास है की सभी को वास्तु के विषय में पर्याप्त जानकारी मिल सके और अपनी समस्याओं के सामाधान के लिए किसी को कहीं ओर भटकना नहीं पड़े. इसलिए आप नियमित हमारी साईट पर विजिट करते रहें और हमारे कोर्स ‘आओ वास्तु सीखें का ध्यान पूर्वक अध्ययन करें. ‘आओ वास्तु सीखें’ के ध्यानपूर्वक अध्ययन से आप जल्दी ही इसमें पारंगत हो जायेंगे, ऐसा हमारा विश्वास है. इस कड़ी में आज का विषय है वास्तु विज्ञान का बेसिक सूत्र.वास्तु विज्ञान का बेसिक सूत्र

इसी कड़ी में आज का पाठ- वास्तु विज्ञान का बेसिक सूत्र

वास्तु के अनुसार उत्तर पुर्व हल्का, नीचा और ज्यादा खुला होना चाहिए क्योंकि इसी दिशा से शुभ ऊर्जा घर में प्रवेश करती है. जबकि दक्षिण पश्चिम दिशा ऊँची, भारी और बंद रहनी चाहिए. ब्रह्म स्थान यानि मकान का सेंटर पांइट हल्का और हो सके तो ओपन टू स्काई होना चाहिए. पंच तत्वों के हिसाब से घर में विभिन्न कक्षों का निर्धारण करना चाहिए. बस यही पुरे वास्तु विज्ञान का बेसिक सूत्र है.

COMMENTS