अब धर्म का प्रचार करने पर भी देना होगा टैक्स, धार्मिक किताबों और लंगर पर लगेगा GST

अब धर्म का प्रचार करने पर भी देना होगा टैक्स, धार्मिक किताबों और लंगर पर लगेगा GST

GST यानी गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स के दायरे में सभी धार्मिक ग्रन्थ, डीवीडी, लंगर और सभी तरह की धर्म का प्रचार करने वाली सामग्री को रखा जा रहा है. इस सम...

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GST यानी गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स के दायरे में सभी धार्मिक ग्रन्थ, डीवीडी, लंगर और सभी तरह की धर्म का प्रचार करने वाली सामग्री को रखा जा रहा है. इस सम्बन्ध में महाराष्‍ट्र में अथॉरिटी फॉर एडवांस रूलिंग (AAR) ने GST के रिलेटेड आई एक अर्जी पर फैसला सुनाया है. महाराष्‍ट्र में अथॉरिटी फॉर एडवांस रूलिंग ने कहा है की इस प्रकार की सभी वस्तुओं को GST से बाहर नहीं रखा जा सकता क्योंकि इनकी बिक्री बिज़नस है.धर्म का प्रचार

इस बाबत AAR के सामने श्रीमद राजचंद्र आध्यात्मिक सत्संग साधना केंद्र ने धार्मिक किताबों, मैगजीन आदि को टैक्‍स के दायरे से बाहर रखने की दलील दी थी. संस्‍था की ओर से तर्क दिया गया कि इससे हम अध्‍यात्‍म और धर्म का प्रचार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस कार्य को कारोबार की संज्ञा देना सही नहीं होगा. संस्‍थान की अपील को AAR ने यह कहते हुए ठुकरा दिया है कि जब तक विशेष छूट न दी जाए तब तक किताबों, सीडी और स्‍टेचू की ब्रिकी, शिविर या सत्‍संग का आयोजन जीएसटी के दायरे में आएंगे.

आपको बता दें की इस मामले में AAR का यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है. इससे स्‍पष्‍ट हो जाता है कि संस्‍था की स्‍टेट्स क्‍या है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है. जीएसटी में एक्टिविटी पर फोकस है, आप क्‍या काम कर रहे हैं, यह सबसे अहम है. AAR के इस फैसले से स्‍पष्‍ट तौर पर जो लोग ट्रस्ट बनाकर इस तरह का बिज़नस कर रहे हैं उन्हें अब अपने टैक्‍स का कैल्‍कुलेशन दोबारा से करना पड़ेगा.