अब धर्मगुरु सिखायेंगे जनता को परिवार नियोजन, बेसहारा सरकार को अब इन्ही का सहारा

अब धर्मगुरु सिखायेंगे जनता को परिवार नियोजन, बेसहारा सरकार को अब इन्ही का सहारा

हमारे देश की लगातार बढ़ रही जनसंख्या को लेकर स्वास्थ्य विभाग काफी चिंतित नजर हैं. सख्त कदमों की कमी के परिणाम स्वरूप प्रदूषण नियन्त्रण में असफल रहे स्...

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हमारे देश की लगातार बढ़ रही जनसंख्या को लेकर स्वास्थ्य विभाग काफी चिंतित नजर हैं. सख्त कदमों की कमी के परिणाम स्वरूप प्रदूषण नियन्त्रण में असफल रहे स्वास्थ्य विभाग ने देश में बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए धर्मगुरुओं से सहायता लेनी पड़ रही हैं. जनसंख्या नियंत्रण के प्लान के अनुसार, सभी धर्मों के धर्मगुरुओं को एक साथ बैठाकर अफसर इस मुद्दे पर आमजन को जागरूक करने में सहयोग की अपील कर रहें हैं. सरकार और स्वास्थ्य विभाग का मानना है की आमजनता धर्मगुरुओं का सम्मान करती हैं और उनकी बातों को तवज्जो भी देती हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दें की मेरठ में मंगलवार को हेल्थ विभाग ने धर्मगुरुओं के साथ इसी मुद्दे पर कार्यशाला का आयोजन किया हैं.

जनसंख्या नियंत्रण को लेकर स्वास्थ्य विभाग परिवार नियोजन का कार्यक्रम भी जारी कर रहा हैं. फिर भी समस्या ये हैं की परिवार नियोजन अर्थात नसंबदी के लिए केवल महिलाएं आगे आ रही हैं जबकि पुरुष इस योजना से किनारा करते नजर आ रहे हैं.

बीते तीन महीनों में उत्तरप्रदेश के मुजफ्फरनगर से जो रिपोर्ट सामने आई हैं उसमें नसबंदी के लिए आये पुरुषों की संख्या मात्र 11 रही, वहीं महिलाओं की बात करें तो उनकी संख्या 400 से भी अधिक रही हैं. पुरुषों का सोचना है की नसबंदी से कमजोरी आ जाएगी और वह अपना कार्य सुचारू रूप से नहीं पाएंगे, ऐसे हालत में  में वह परिवार का भरणपोषण कैसे कर पाएंगे? केवल इतना ही नहीं पुरुषों का ये भी सोचना है की नसबंदी कराने से समाज में बेइज्जती होगी. ऐसी समस्याओं से निजात पाने के लिए सरकार धर्मगुरुओं का सहारा ले रही हैं. सार्थक कल का प्रयास, परिवार नियोजन के साथ की सोच लेकर धर्मगुरुओं द्वारा सम्मेलन करवाए जा रहे हैं. इन सम्मेलनों में जनसंख्या नियंत्रण, अनचाहा गर्भपात आदि विषयों को लेकर अपने धर्म से जुड़े लोगों को समझाने की कोशिस की जा रही हैं.

आपकी जानकारी के लिए बता दें की मेरठ में हुए धर्मगुरुओं सम्मेलन की तरह यूनिसेफ की सहायता से सभी जिलों में सम्मेलन किये गए. मेरठ में हुए हिंदू, मुस्लिम, सिख-ईसाई सभी धर्म के गुरुओं ने हिस्सा लिया था. जिसमें सभी ने एक मत से जनसंख्या नियंत्रण के लिए धार्मिक भ्रांतियों को दूर कर जागरूक करने का फैंसला लिया हैं.