अगर महसूस होता है कभी-कभी शरीर में सुन्नापन, तो हो जाएं सावधान ये है गंभीर खतरे का संकेत

अगर महसूस होता है कभी-कभी शरीर में सुन्नापन, तो हो जाएं सावधान ये है गंभीर खतरे का संकेत

आज के समय में तंदरुस्त रहना सभी चाहते हैं लेकिन समयाभाव के कारण या फिर शरीर के प्रति हमारी बहुत अधिक लापरवाही के कारण हम अपना सही ढंग से ख्याल नहीं रख...

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आज के समय में तंदरुस्त रहना सभी चाहते हैं लेकिन समयाभाव के कारण या फिर शरीर के प्रति हमारी बहुत अधिक लापरवाही के कारण हम अपना सही ढंग से ख्याल नहीं रख पाते परिणामस्वरूप हमारा शरीर बिमारी का शिकार हो जाता है. इसी कड़ी में आज हम बात करेंगे शरीर में सुन्नापन की समस्या की-

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सुन्नापन शरीर में खून के थक्के बनने के कारण, शरीर के किसी भी भाग में सुन्न अथवा करंट फैलने जैसा आभास होता है. यह एक सामान्य बीमारी है लेकिन यदि बात बढ़ जाये तो जानलेवा भी हो सकती है. जब बॉडी की नस काम करना बंद कर देती है तब हमारे शरीर में एक चेन रियेक्शन उत्पन हो जाता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नस के अंत में खून के थक्के जमने लगते हैं और साथ-ही-साथ शरीर में खून को जमाने वाले फर्मेन्टर की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे शरीर की नसों में खून बहने की समस्या आने लगती है.

थक्का अर्थात् ब्लड क्लॉट अपने आप बनता है जो सामान्य प्रक्रिया में क्षतिग्रस्त नलिकाओं की मरम्मत करने का कार्य करता है. थक्के का कार्य शरीर के जिस भाग में चोट लगी है वहां खून के बहाव को रोकना है. थक्के का निर्माण शरीर में मौजूद प्लाज्मा जिसमें प्लेटलेट्स और प्रोटीन होता है उससे चोट वाले स्थान पर थक्का बनता हैं. थक्का यदि खून में नही घुलता है और लंबे समय तक बना रहता है तो वह सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता हैं. इसके बाद सही जांच एवं उपचार की जरूरत होती है. लंबे समय तक उपचार न मिलने से  रक्त के थक्के धमनियों अथवा नसों में चले जाते हैं और शरीर के किसी भी हिस्से जैसे आंख, हृदय, मस्तिष्क, फेफड़े और गुर्दे आदि में पहुंच उन अंगों के कार्य को बाधित करते हैं.

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पूरा दिन एक ही स्थान पर बैठकर लगातार काम करने वाले व्यक्ति को खून में थक्के जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है. इसके कुछ स्वभाविक कारण भी हो सकते है जैसे बुढ़ापा,  मोटापा,  धूम्रपान की लत,  वैरिकॉज वेन्स , लंबे समय लेटे रहने पर (हड्डी जोड़ने के लिये लगे प्लास्टर के कारण,  लंबे सफर में,  इत्यादि) तथा हार्मोंन असंतुलन पैदा होने के कारण भी खून में थक्केह की समस्या हो सकती है. एक नए शोध से पता चला है, जो व्यक्ति लगातार 10 घंटे तक कार्य करते है और इस दौरान कोई विराम भी नहीं लेते तो उनमें खून के थक्के जमने का खतरा दोगुना होने की संभावना है. इसलिए शरीर के लिए आराम भी जरूरी हो जाता है. लगातार बैठे रहने की बजाय निश्चित अवधि के पश्चात आस-पास एक चक्कर लगाएं ताकी पैरों में थक्का न बने.

लक्षण, शुरुआत के समय में लक्षण का पता आसानी से नहीं चलता है. लेकिन बाद में… चेहरे, हाथ या पैर  विशेष रूप से शरीर के एक तरफ सुन्नता अथवा अचानक कमजोरी होना. मस्तिष्क पर प्रभाव जैसे भम्र और समझने में कठिनाई, चलने में परेशानी, चक्कर आना, बिना कारण अचानक सिरदर्द, प्रभावित भाग पर सूजन अथवा लाल रंग का दिखाई देना, आदि लक्षण हो सकते है.

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उपचार- थक्कों को बनने से रोकने के लिए डॉक्टर से सहायता ली जा सकती है. रोकथाम के लिए ये प्रक्रिया भी है जिसमें कैथेटर नामक एक लंबी टय़ूब को सर्जरी से अंदर डाला जाता है और रक्त के थक्के के पास ले जाया जाता है,  जहां थक्के को घोलने वाली दवाई छोड़ दी जाती है. इसके अलावा सर्जरी की सहायता से भी थक्के को हटाया जा सकता है.

ब्लैक-टी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होती है क्योंकि यह खून को गाढ़ा होने से रोकने के साथ-साथ नसों में खून के प्रवाह को सरल बनाती है जिस कारण से ब्लडप्रेशर भी नियंत्रित रहता है. यदि रोजाना एक सेब या संतरे का सेवन करें तो आपको खून के थक्के जमने की समस्या से छुटकारा मिल सकता है. नियमित रूप से व्यायाम करें और वजन को नियंत्रित करें. फल, सब्जियों तथा अनाज का सेवन अधिक करें और नमक, फैट का सेवन कम करें. डॉक्टर से ब्लड प्रेशर की नियमित जांच करवाते रहे.

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