बड़े बुजुर्गों के चरण छूकर लीजिये आशीर्वाद, बन जाओगे दुनिया के सबसे दौलतमंद

बड़े बुजुर्गों के चरण छूकर लीजिये आशीर्वाद, बन जाओगे दुनिया के सबसे दौलतमंद

हमारी संस्कृति में बड़े-बुजुर्गों के चरण छूने की परम्परा रही है. चरण छूकर उनका आशीर्वाद लेना एक ओर जहाँ हमारी सभ्य और सुसंस्कारित परवरिश के परिचायक है ...

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हमारी संस्कृति में बड़े-बुजुर्गों के चरण छूने की परम्परा रही है. चरण छूकर उनका आशीर्वाद लेना एक ओर जहाँ हमारी सभ्य और सुसंस्कारित परवरिश के परिचायक है वहीँ इसका हमें आध्यात्मिक लाभ भी मिलता है. चरण छूने से मिलने वाले लाभ को आज वैज्ञानिक भी सिद्ध कर चुके हैं. बड़ों के पैर छूने से सकारात्मक उर्जा हमारे शरीर में प्रवेश करती हैं. लेकिन आज के मोडर्न जमाने में सभी केवल हाथ जोड़कर अथवा सर झुकाकर एक-दूसरे को नमस्कार करते हैं. ऐसा करने से हमारी किसी व्यक्ति के प्रति, अपनी प्यार और आदर की भावना तो स्पष्ट हो जाती है लेकिन शारीरिक रूप से कोई लाभ नहीं मिलता हैं. शारीरिक लाभ की प्राप्ति के लिए जरूरी हो जाता है की आप चरण स्पर्श के प्राचीन तरीकों के बारे में जान लें.

धर्म के अनुसार, बड़ों के चरणों को आदर के साथ छूकर आशीर्वाद लेना सबसे उत्तम माना गया हैं. विज्ञान में भी कथन है की इस परम्परा से शारीरिक, मानसिक और वैचारिक स्वभाव का सर्वोतम विकास होता हैं. चरण छूने को लेकर कहावत है की जब हम किसी बड़े व्यक्ति के पूरी श्रद्धा के साथ चरण छूते है तो सीधे भगवान को नमस्कार करते है अर्थात् वो पैर छूना सीधा भगवान तक जाता है और अच्छा फल प्रदान करता हैं.

चरण को छूने के कई तरीके हैं जैसे- सीधा झुककर पैर छूना, दूसरा घुटनों के बल बैठकर और जमीन पर लेटकर पैर छूना. तरीका जो भी रहा हो लेकिन दिल में भावना अच्छी होने से परिणाम भी शुभ होता हैं.

श्रद्धा के साथ चरण स्पर्श करने से विनम्रता आती है और मन को शांति मिलती है. इसके अलावा चरण छूने वाला दूसरों को भी अपने आचरण से प्रभावित करने में सफल होता हैं.

किसी बड़े के चरण छूने से उसका हाथ हमारे सर पर स्पर्श होता हैं, ऐसा माना जाता है की पूजनीय व्यक्ति की पॉजिटिव एनर्जी आशीर्वाद के रूप में हमारे शरीर में प्रवेश करती है. साथ ही साथ इससे हमारा आध्यात्मिक तथा मानसिक विकास भी होता है.

वैज्ञानिक नजरिये से देखें तो छूने से हमारी कमर दर्द, जोड़ो के दर्द और पैर दर्द की समस्या में भी आराम मिलता हैं. चरण स्पर्श करते समय कमर से पुरा झुकना पड़ता है जिससे कमर और पैर दोनों ही मुड़ते है और व्यायाम हो जाता हैं. शरीर भी स्वस्थ और चुस्त बना रहता हैं.

चरण स्पर्श और चरण वंदना भारतीय संस्कृति में सभ्यता और सदाचार का प्रतीक माना जाता है. कहा जाता हैं की मनुष्य के पैर के अंगूठे से भी ऊर्जा प्रसारित करने की शक्ति होती है. साथ ही ये मान्यता है की बड़े-बुजुर्गों के चरण स्पर्श करने से कई प्रतिकूल ग्रह भी अनुकूलता की स्थिति में आ जाते हैं.

मनोवैज्ञानिक पक्ष के अनुसार, जिन लक्ष्यों की प्राप्ति को मन में रखकर बड़ों को प्रणाम किया जाता है तो उस लक्ष्य को पाने का बल प्राप्त होता हैं. पैर छूने से शारीरिक कसरत होती है. झुककर पैर छूने और घुटने के बल बैठकर प्रणाम करने अथवा साष्टांग दंडवत से शरीर लचीला बनता है. पैर छूने से सबसे बड़ा फायदा ये है की इससे मनुष्य में अहंकार की कमी होती हैं. शायद इसलिए इसको परम्परा में जगह दी गई हैं ताकि सभी को इसका नियमित लाभ मिलता रहें.

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