बदलता मौसम लेकर आता है बिमारियों की सौगात, जानें इससे बचने के उपाय

बदलता मौसम लेकर आता है बिमारियों की सौगात, जानें इससे बचने के उपाय

बरसात के दिनों में मच्छरों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हो जाती हैं. मच्छर रोगों को फैलाने के लिए यातायात का काम करते हैं. मच्छरों का आकार छोटा और उड़ने क...

कैंसर के इलाज को लेकर वैज्ञानिकों की बड़ी सफलता, दो रूपये की इस चीज से कैंसर जड़ से खत्म
सलाह: गर्मियों में गलत खाना बिगाड़े आपकी सेहत, जरा संभलकर खाएं और तंदरुस्त रहें सालभर
आपकी पहली पसंद बन जाएगी ग्वार फली, अगर आप ने जान लिए इसके फायदे

बरसात के दिनों में मच्छरों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हो जाती हैं. मच्छर रोगों को फैलाने के लिए यातायात का काम करते हैं. मच्छरों का आकार छोटा और उड़ने की गति अधिक होती, कई बार ये परेशानी का कारण भी बन जाते हैं. शाम के समय में मच्छर अधिक काटते हैं. स्वास्थ्य विभाग द्वारा हर साल लाखों रुपए मच्छरों से फैलने वाली बिमारियों के रोकथाम पर खर्च किये जाते हैं. फिर भी मच्छरों को समाप्त करना कठिन कार्य बना हुआ हैं.

सरकार का दावा है की मच्छरों के आतंक से लोगों को बचाने के लिए फागिंग की निति भी बनाई गई हैं. मच्छर मारने के लिए सड़कों पर नीला धुंआ उड़ाने पर रोजाना हजारों रुपये खर्च किए जाते रहे है. नालों तथा नालियों में एंटी लार्वा दवा का छिड़काव भी किया जाता है.

मौसम

अध्ययन से पता चला है की शहर में मच्छर मारने की दवाओं का सालाना कारोबार करीब छह से सात करोड़ का है. मगर मच्छरों को काबू कर पाने के लिए ये प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं. इसमें सभी ब्रांड की क्वायल और लिक्विड दोनों शामिल है. दवाओं की सबसे ज्यादा बिक्री फरवरी-मार्च और अक्तूबर-नवंबर में देखी गई हैं. फरवरी मार्च में ऐसा भी हो जाता है कि मच्छर मारने के प्रोडक्ट की बाजार में कमी हो जाती हैं. बता दें हर वर्ष इन उत्पादों का छह से सात करोड़ रुपये का सालाना कारोबार किया जाता हैं. मच्छरों के आतंक के देखते हुए उनके लिए उत्पादों के कारोबार को हर साल बढ़ाया जा रहा हैं.

बरसात का मौसम आने के साथ-साथ मच्छरों की संख्या में भी काफी बढ़वार हो जाती हैं. बदलते मौसम में शरीर को ढलने में थोड़ा समय लग जाता हैं. मच्छर मलेरिया जैसे रोगों को फैलाने में अहम भूमिका निभाते है. वर्षा के दिनों में जुखाम, खुजली जैसी समस्या भी बढ़ जाती है. ऐसे में जरूरी हो जाता है की स्वास्थ्य का ख्याल रखें. स्वास्थ्य को बनाए रखने के आप ये उपाय अपना सकते हैं.मौसम

बरसात के मौसम में शरीर को स्वच्छ रखना चाहिए. दिन में सुबह और शाम स्नान करना भी जरूरी होता है.

मच्छरों से छुटकारा पाने के लिए मच्छरदानी का इस्लेमाल करना चाहिए. प्रयास करें की बरसात का जल या घर के बाथरूम का पानी अधिक समय तक एक जगह खड़ा न रहे.

पालतू पशुओं के आसपास मच्छरों को भगाने के लिए नीम के पतों से बने धुंए का इस्तेमाल किया जा सकता है.

आजकल के समय में पीले रंग के बल्ब का उपयोग किया जाता हैं लेकिन इससे बिजली की अधिक खपत भी होती हैं.

जब रात को बिजली ना हो तो या फिर किसी को खेत में पानी देने जाना हो तो एंटी मोस्कीटो क्रीम का प्रयोग कर सकते हैं.

इस बदलते मौसम में सबसे अधिक दिक्कत होती है पीने के पानी से. ये दिन होते हैं फ्रीज के पानी को पीना बंद करने के. अगर हमने इन दिनों में फ्रीज़ का पानी पीना नहीं छोड़ा तो निसंदेह ही हम बीमार पड़ जायेंगे.

अगर इन दिनों में बुखार आ जाये तो बिना कोई देरी किये डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए और वायरल बुखार या मलेरिया के लिए चेकअप जरूर करना चाहिए.

शरीर में किसी भी प्रकार की समस्या होने पर डॉक्टर को दिखाना चाहिए. क्योंकि छोटी सी समस्या कभी भी विराट रूप ले सकती हैं.

वर्षा के दिनों में विभिन्न प्रकार के नये जीवों का जन्म होता हैं. इसलिए किसी भी प्रकार के कपड़े का इस्लेमाल करने से पहले जांच ले की कहीं उसमें जीव तो नहीं है. खासकर सोने के बिस्तर को अच्छी तरह से साफ करना चाहिए. धूप में कपड़ों को अच्छी तरह से सेंकना चाहिए.

मौसम

मच्छर से बचने के लिए विशेषज्ञ की राय

डॉ. आशुतोष वर्मा के अनुसार, फॉगिंग से फौरी तौर पर मच्छर हवा में उड़ रहे मच्छर मर जाते है लेकिन गंदे पानी में पनप रहा लार्वा समाप्त नहीं होता हैं. मच्छर सबसे अधिक कूलर के पानी में एकत्रित होते हैं. कूड़े का ढेर, सीवर लाइन और जहां भी गंदा पानी जमा है उन स्थानों पर मच्छरों की भरमार होती है. फॉगिंग होने से अस्थायी तौर पर मच्छर मर जाते है फिर भी फॉगिंग का नालियों तथा गंदे पानी में पनप रहे लार्वा और मच्छरों के अंडों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता और मच्छर पूर्णतया समाप्त नहीं होते हैं.