भगवान को खुश करने के चक्कर में कर रहे धर्म का अपमान, दे रहे है मौत को निमन्त्रण

भगवान को खुश करने के चक्कर में कर रहे धर्म का अपमान, दे रहे है मौत को निमन्त्रण

जैसा की हम सभी जानते हैं की सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए बहुत अधिक नुकसानदायक है लेकिन क्या आप जानते हैं की इससे भी अधिक खतरनाक धुंआ हमारे घर में, हम ...

दिवाली पर पटाखों की बिक्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दिया ये आदेश
Box Office: संजू की धुँआधार कमाई ने तोड़े रिकॉर्ड, दो दिनों में हुई इतनी कमाई की पीछे रह गए सलमान
आखिरकार झुक गया बर्बादी का बादशाह, युद्ध की धमकियों के बीच किम जोंग दक्षिण कोरिया से बातचीत को तैयार

जैसा की हम सभी जानते हैं की सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए बहुत अधिक नुकसानदायक है लेकिन क्या आप जानते हैं की इससे भी अधिक खतरनाक धुंआ हमारे घर में, हम खुद अपने ही हाथों से रोजाना करते है और अपने बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं, सभी को अनजाने में ही इस खतरनाक धुएं की जद में ले आते हैं. जिसका हमें आभास तक नहीं होता की हम अनजाने में ही कितना खतरनाक काम कर रहे हैं. अब बात करते है असल मुद्दे की-धर्म का अपमान

हम अपने घरों में रोजाना अगरबत्ती का प्रयोग करते हैं ये सोचकर की इससे भगवान खुश होंगे, हमें दीर्घायु मिलेगी और मिलेगा एक लम्बा तंदरुस्त और खुशहाल जीवन. लेकिन भगवान खुश होते हैं या नहीं? ये तो पता नहीं परन्तु हम अपने ही हाथों, अपनों का ही बहुत बड़ा नुक्सान कर बैठते है. जिस अगरबत्ती को हम खुशबूदार समझकर उसके धुएं के आसपास ही मंडराते रहते हैं वो कितनी खतरनाक होती है? ये बात आपको ये लेख पढ़कर समझ आ जायेगा.

एक अध्ययन से पता चला है की अगरबत्ती के धुएं में शामिल केमिकल शरीर के डीएनए तक को बदलने की ताकत रखते हैं. घरों में जलाई जाने वाली अगरबत्ती के धुएं में शामिल हानिकारक तत्वों से डीएनए जैसे- जेनेटिक मटीरियल में बदलाव आने के साथ-साथ म्यूटेशंस का कारण भी बन सकता हैं.धर्म का अपमान

धर्मों में देखें तो सनातन हिन्दू धर्म में अगरबत्ती का प्रयोग वर्जित किया गया है. आपकी जानकारी के लिए बता दें की दाह संस्कार में भी बांस नहीं जलाते है फिर बांस से बनी अगरबत्ती जलाकर भगवान को भला कैसे प्रसन्न किया जा सकता हैं? शास्त्रों में कहा गया है की बांस की लकड़ी जलाने से पितृदोष का पाप लगता है. शास्त्रों में पूजा के विधि-विधान के समय कहीं भी अगरबत्ती का वर्णन नही मिलता हैं. सिर्फ धुप ही लिखा है. रसायन पदार्थों से बनी अगरबत्ती और बांस जलने से भगवान खुश कैसे होंगे? प्राचीन कहावत है की बांस को जलाने से वंश जलता है.

साउथ चाइना यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नॉलजी और चीन की चाइना टबैको ग्वांगडंग इंडस रेल कंपनी के द्वारा अध्ययन गया हैं जिसमें सिगरेट और अगरबत्ती के धुएं से होने वाले नुकसान के बारे में तुलनात्मक अध्ययन किया गया.धर्म का अपमान

विभिन्न देशों में घरों के भीतर पूजाकक्ष में अगरबत्ती और धूप जलाना काफी प्रचलन में है. शायद आप नहीं जानते है की इसके जलने के दौरान पार्टिकल मैटर हवा में मिल जाते है और सांस लेने पर हवा के साथ फेफड़ों तक पहुंचकर वहीं रह जाते हैं. इसका प्रभाव सेहत पर काफी हानिकारक होता हैं.

अध्ययन में पाया गया की अगरबत्ती के धुएं में 99 फीसदी अल्ट्राफाइन और फाइन पार्टिकल्स होते है. इससे सिगरेट के धुएं की तुलना में जिंदा सेल्स को ज्यादा नुकसान होता है और कैंसर का कारण बनता हैं.

आपकी जानकारी के लिए बता दें की अगरबत्ती एवं धूपबत्ती के धुएं में पाए जाने वाले पॉलीएरोमैटिक हाइड्रोकार्बन के कारण पुजारियों में अस्थमा, कैंसर, सरदर्द एवं खांसी की गुंजाइश कई गुना ज्यादा मिली हैं. खुशबूदार अगरबत्ती को घर के अंदर जलाने से वायु प्रदूषण के साथ-साथ कार्बन मोनोऑक्साइड भी बनती है. यदि आप भी पूजा के समय में अगरबत्ती जलाते हैं तो आप आदत बदल दें और केवल घी या तेल का दिया ही जलाएं. ध्यान रहे की बंद कमरे में अगरबत्ती न जलाएं. इससे धुएं की सान्द्रता बढ़ जाती है जिससे फेफड़ों पर ज्यादा प्रभाव पड़ता हैं.धर्म का अपमान

अगरबत्ती की शुरुआत कुछ इस प्रकार हुई थी. यवनों ने भारत पर आक्रमण किया तो उन्होंने देखा हिन्दू सैनिक युद्ध से पहले पूजा-पाठ पूर्ण करते थे. इस पूजा के दौरान धूप अथवा दीप जलाकर अपने इष्ट को प्रसन्न किया जाता था. जिससे यवनों को हार मिलती थी.  ये सब देख कर औरंगजेब जैसे आक्रमणकारियों ने हमारे पूजा स्थलों को खंडित करना शुरू किया ताकि हिंदुओ को अपने इष्ट से शक्ति की प्राप्ति ना हो सके और उनकी युद्ध में हार हो जाए. मंदिर तोड़े जाने से हिंदू सेना और भड़क उठती अपनी पूरी ताकत लगाकर यवनों को हरा देती थी, क्योंकि आस्था में काफी ताकत होती हैं. यह सब देख यवन सेना के बुद्धिजिवियों ने विचार किया की हिन्दुओं के भगवान बहुत शक्तिशाली है जो पूजा-पाठ करने पर हिन्दुओं को शक्ति देते हैं. परिणाम स्वरूप हमारी सेना हार जाती है. विवश होकर उन्होंने हमारे धर्म ग्रन्थों का अध्यन किया तो शास्त्रो में पाया की हिंदू धर्म में बांस जलाना वर्जित है.

धर्म का अपमान

यवनों के युद्ध में हजारों सैनिक एक दिन में मारे गये थे. उन्हें एक साथ दफनाने में युद्ध भूमि पर बहुत बदबू फैल जाती थी. शायद इसलिए यवनों ने बांस पर वातावरण शुद्ध करने वाली भारतीय हवन सामग्री लपेट कर अगरबत्ती बनाई उसे कब्र पर जलाने से बदबू से छुटकारा मिल गया. यवनों ने हमारे भारतीय सैनिको को अगरबत्ती दिखा कर समझाया की देखो, तुम्हारे भगवान सुगंधित धूप से प्रसन्न होते है. अगरबत्ती जलाया करो कितनी अच्छी सुगन्ध आती है. जिससे सैनिको की पूजा खण्डित होने लगी थी.

COMMENTS