जन्मदिन विशेष: हिन्दी भाषा के सुप्रसिद्ध साहित्यकार, व्यंग्यकार और हास्य कवि रामकुमार वर्मा

जन्मदिन विशेष: हिन्दी भाषा के सुप्रसिद्ध साहित्यकार, व्यंग्यकार और हास्य कवि रामकुमार वर्मा

‘जिस देश के पास हिंदी जैसी मधुर भाषा है वह देश अंग्रेज़ी के पीछे दीवाना क्यों है? स्वतंत्र देश के नागरिकों को अपनी भाषा पर गर्व करना चाहिए. हमारी भावभ...

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‘जिस देश के पास हिंदी जैसी मधुर भाषा है वह देश अंग्रेज़ी के पीछे दीवाना क्यों है? स्वतंत्र देश के नागरिकों को अपनी भाषा पर गर्व करना चाहिए. हमारी भावभूमि भारतीय होनी चाहिए और हमें जूठन की ओर नहीं ताकना चाहिए’- डॉ. रामकुमार वर्मा

नाम- डॉ. रामकुमार वर्मा (बचपन में इन्हें कुमार के नाम से पुकारा जाता था.)

जन्म- 15 सितम्बर 1905 को सागर ज़िला, मध्यप्रदेश में हुआ था.

माता/पिता- इनके पिता का नाम लक्ष्मी प्रसाद वर्मा था वो डिप्टी कलैक्टर थे और माता का नाम श्रीमती राजरानी देवी था. इनकी माता जी हिन्दी कवयित्रियों में विशेष स्थान रखती थी.

शिक्षा- वर्मा जी को प्रारंभिक शिक्षा इनकी माता श्रीमती राजरानी देवी ने अपने घर पर दी थी. परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करते हुए प्रयाग विश्वविद्यालय से हिन्दी विषय में एम. ए. में सर्वप्रथम आये. ये सदैव अपनी कक्षा में प्रथम आते थे. पठन-पाठन की प्रतिभा के साथ ही साथ रामकुमार वर्मा शाला के अन्य कार्यों में भी काफ़ी सहयता करते थे. रामकुमार वर्मा ने नागपुर विश्वविद्यालय की ओर से ‘हिन्दी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास पर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की.रामकुमार वर्मा

कार्य- डॉ. रामकुमार वर्मा अभिनेता बनना चाहते थे. इन्होने विद्यार्थी जीवन में कई नाटकों में एक सफल अभिनेता का कार्य भी किया. रामकुमार वर्मा सन् 1922 ई. में दसवीं कक्षा में हुए उसी समय प्रबल वेग से असहयोग की आँधी उठी और रामकुमार वर्मा राष्ट्र सेवा में हाथ बँटाने लगे तथा एक राष्ट्रीय कार्यकर्ता के रूप में जनता के सम्मुख आए. रामकुमार वर्मा रूसी सरकार के विशेष आमंत्रण पर मास्को विश्वविद्यालय के अंतर्गत प्रायः एक वर्ष तक शिक्षा कार्य किया.

रचनाएँ- अंजलि, अभिशाप, निशीथ, जौहर, चित्तौड़ की चिता आदि.

रामकुमार वर्मा जी को आधुनिक हिन्दी साहित्य के सुप्रसिद्ध कवि, एकांकी नाटक-लेखक और आलोचक माना जाता है. ‘चित्ररेखा’ काव्य-संग्रह पर उन्हें हिन्दी का सर्वश्रेष्ठ ‘देव पुरस्कार’ मिला. साथ ही ‘सप्त किरण’ एकांकी संग्रह पर अखिल भारतीय साहित्य सम्मेलन पुरस्कार और मध्यप्रदेश शासन परिषद से ‘विजयपर्व’ नाटक पर प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किये गए थे. हिन्दी एकांकी के जनक रामकुमार वर्मा ने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और साहित्यिक विषयों पर 150 से अधिक एकांकी लिखीं हैं. भगवतीचरण वर्मा ने कहा था, “डॉ. रामकुमार वर्मा रहस्यवाद के पंडित है, उन्होंने रहस्यवाद के हर पहलू का अध्ययन किया है.

वर्मा जी 1921 आने तक युवक रामकुमार गाँधी जी के उनके असहयोग आंदोलन में सम्मिलित हो गए थे. उन्होंने 17 वर्ष की आयु में एक कविता प्रतियोगिता में 51 रुपए का पुरस्कार हासिल किया था. यहीं से उनकी साहित्यिक यात्रा आरंभ की हुई थी. डॉ. रामकुमार वर्मा ने देश ही नहीं विदेशों में भी हिन्दी का परचम लहराया था. सन 1957 में वे मास्को विश्वविद्यालय के अध्यक्ष के रूप में सोवियत संघ की यात्रा पर भी गए थे. सन 1963 में उन्हें नेपाल के त्रिभुवन विश्वविद्यालय ने शिक्षा सहायक के रूप में आमंत्रित किया गया था. 1967 में वे श्रीलंका में भारतीय भाषा विभाग के अध्यक्ष के रूप में गए थे. 1990 में ये हम सब को यहीं रोता हुआ छोड़कर दुसरे लोक की लम्बी यात्रा को गमन कर गए.

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