बीजेपी की सुप्रीम कोर्ट में याचिका, ‘दो बच्चे के क़ानून’ को लागू करने की मांग

बीजेपी की सुप्रीम कोर्ट में याचिका, ‘दो बच्चे के क़ानून’ को लागू करने की मांग

निरंतर बढ़ रही आबादी और घटते जा रहे संसाधन भारत ही नहीं अपितु सारी दुनिया के लिए एक गंभीर समस्या है. भारत में यह समस्या निरंतर विकराल रूप धारण करती जा ...

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निरंतर बढ़ रही आबादी और घटते जा रहे संसाधन भारत ही नहीं अपितु सारी दुनिया के लिए एक गंभीर समस्या है. भारत में यह समस्या निरंतर विकराल रूप धारण करती जा रही है. आबादी के लिहाज से भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है. अगर ऐसे ही हमारे देश की आबादी बढती रही तो जल्द ही भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जायेगा. जनसँख्या नियंत्रण के कानून बनाने को लेकर यदा-कदा आवाज भी उठती रही है लेकिन कोई भी सरकार इस मामले में क़ानून बनाकर इसे अमलीजामा नहीं पहना पाई.

गुरूवार को बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने इसी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है. उपाध्याय ने अपील की है कि ‘टू चाइल्ड नॉर्म’ को कानून बनाकर लागू किया जाये. उन्होंने सांसद, विधायक, निगम पार्षद का चुनाव लड़ने वालों के लिए टू चाइल्ड नॉर्म को अनिवार्य करने की मांग की. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरी पाने के लिए और कोई भी राजनीतिक पार्टी में मेम्बर बनने वालों के लिए भी इस कानून को अनिवार्य करने की मांग की. इसके अलावा सरकार द्वारा दी जाने वाली सभी सुविधाओं का लाभ पाने के लिए भी इसे अनिवार्य घोषित किया जाये.

इस याचिका में उन्होंने कोर्ट से अपील करते हुए कहा कि केंद्र सरकार को भी सुप्रीम कोर्ट इस ‘दो बच्चे के कानून’ को लागू करने के लिए यथासंभव कदम उठाने के लिए निर्देश जारी करें. उन्होंने आगे कहा कि इस कानून के तहत दो या दो से अधिक बच्चे पैदा करने वालों को सरकारी सुविधाओं के लाभ से वंचित किया जाये और उन्हें चुनाव लड़ने से भी रोका जाये.

गौरतलब है कि इससे पहले भी केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और बीजेपी के सांसद साक्षी महाराज ने भी जनसँख्या नियंत्रण करने के लिए कारगर क़ानून बनाने की वकालत की थी. आपको बता दें कि आजादी के समय भारत की जनसँख्या लगभग 33 करोड़ थी जो अब 130 करोड़ से भी ज्यादा हो चुकी है. आबादी के लिहाज से चीन दुनिया का सबसे बड़ा देश है और भारत दुसरे नंबर है. एक अनुमान के मुताबिक भारत की आबादी हर साल 8 करोड़ की दर से बढ़ रही है.

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