BRICS में मोदी का धमाका, आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को पटखनी

ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद से निपटने के लिए व्यापक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया है और लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) जैसे आतंकवादी सं...

क्या है केंद्र की परिभाषा और उत्तरदायित्व? इंटरव्यू में सबसे अधिक पूछे जाने वाले प्रश्न
हरितालिका तीज: पति की दीर्घायु के लिए सुहागिनें करती है इतना कठिन व्रत, जानें इसके नियम
नोटबंदी पर बड़ा खुलासा, पहली बार RBI ने जारी किये आंकड़े

ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद से निपटने के लिए व्यापक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया है और लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) जैसे आतंकवादी संगठनों द्वारा हिंसा पर चिंता जताई है.

लश्कर और जैश भारत में आतंकी हमलों में शामिल रहे हैं. ब्रिक्स देशों के नौवें सम्मेलन में पारित घोषणापत्र में ब्रिक्स देशों में हुए हमलों सहित दुनियाभर में हुए आतंकवादी हमलों की निंदा की गई. घोषणापत्र में कहा गया, “हम आतंकवाद के सभी रूपों में निंदा करते हैं, यह चाहे कहीं भी हो और किसी के भी द्वारा किया जा रहा हो. आतंकवाद के किसी भी कृत्य का कोई औचित्य नहीं है.”

आपको बता दें कि ब्रिक्स में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं, और चीन में इस समय नोवाँ सम्मलेन हो रहा है. ब्रिक्स देशों ने आतंक को परास्त करने के अफगानिस्तान के प्रयासों का समर्थन किया. घोषणापत्र के मुताबिक, “हम इस क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति पर और तालिबान, आईएसआई, अलकायदा और इसके संबद्ध संगठन ईस्टर्न तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट, इस्लामिक मूवमेंट ऑफ उज्बेकिस्तान, हक्कानी नेटवर्क, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, टीटीपी और हिज्ब-उल-तहरीर द्वारा की गई हिंसा पर चिंता व्यक्त करते हैं.”

 

ब्रिक्स देशों का कहना है कि आतंकवाद करने वालों को और इसमें सहयोग देने वालों को, दोनों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए. आतकंवाद को रोकने और इससे निपटने के लिए देशों की प्राथमिक भूमिका और जिम्मेदारी पर जोर दिया गया लेकिन साथ ही कहा गया कि देशों की संप्रभुता और उनके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने का सम्मान करते हुए इस मामले में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की भी जरूरत है.

 

COMMENTS