देश का एकमात्र गाँव जहाँ नहीं होती हनुमान जी की पूजा, ये है इसके पीछे बड़ा कारण

देश का एकमात्र गाँव जहाँ नहीं होती हनुमान जी की पूजा, ये है इसके पीछे बड़ा कारण

पवनपुत्र हनुमान जी को लेकर हाल ही में कई नए और विवादित बयान सामने आये हैं. कोई उन्हें दलित बता रहा है तो कोई मुसलमान, कोई उन्हें खिलाड़ी बता रहा है तो...

लेटेस्ट जॉब्स: दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल में 991 नर्सिंग ऑफिसर के पदों पर वैकेंसी
बीजेपी के कर्ज़माफ़ी के सवाल पर भड़के अशोक गहलोत, कहा- अपना काम कीजिये
कुछ बच्चे तो इतने क्यूट होते हैं की उन्हें देखने के बाद…ऐसे ही मस्तीभरे जोक्स के लिए क्लिक करें

पवनपुत्र हनुमान जी को लेकर हाल ही में कई नए और विवादित बयान सामने आये हैं. कोई उन्हें दलित बता रहा है तो कोई मुसलमान, कोई उन्हें खिलाड़ी बता रहा है तो कोई कुछ ओर. लेकिन एक बात साफ़ है की हनुमान जी हिन्दुओं के प्रमुख आराध्य देव है और भारत के अलावा कई अन्य देशों में भी भगवान हनुमान जी की पूजा की जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं की हमारे देश में भी एक जगह ऐसी है जहाँ भगवान हनुमान जी की पूजा नहीं की जाती. वो भी इसलिए क्योंकि यहाँ के लोग भगवान हनुमान जी से नाराज है.dronagiri village

ये जगह है उत्तराखंड के स्थित द्रोणागिरि गांव (dronagiri village) जो जनपद चमोली के जोशीमठ विकास खण्ड में जोशीमठ नीति मार्ग पर है. यह गांव लगभग 14000 फुट की ऊंचाई पर स्थित है. यहाँ के लोगों की हनुमान जी से नाराजगी का कारण है भगवान जी का यहाँ से संजीवनी बूटी का ले जाना. दरअसल, यहाँ के निवासियों का मानना है की जब लक्षमण जी को शक्ति लगी थी तब हनुमान जी जो संजीवनी बूटी के जिस पर्वत को लेकर गए थे, वो पर्वत यहीं स्थित था.

इसलिए द्रोणागिरि गांव (dronagiri village)के लोग हनुमान जी द्वारा पर्वत उठा ले जाने से नाराज हो गए. यही कारण है कि आज भी यहां हनुमान जी की पूजा नहीं होती. यहां तक कि इस गांव में लाल रंग का झंडा लगाने पर पाबंदी है. शास्त्रों के अनुसार जब हनुमान जी बूटी लेने के लिए इस गांव में (dronagiri village) पहुंचे तो वे भ्रम में पड़ गए. उन्हें कुछ सूझ नहीं रहा था कि किस पर्वत पर संजीवनी बूटी हो सकती है. तब गांव में उन्हें एक वृद्ध महिला दिखाई दी. उन्होंने पूछा कि संजीवनी बूटी किस पर्वत पर होगी? वृद्धा ने द्रोणागिरि पर्वत की तरफ इशारा किया. हनुमान उड़कर पर्वत पर गए पर बूटी कहां होगी यह पता न कर सके.dronagiri village

वे फिर गांव में उतरे और वृद्धा से बूटीवाली जगह पूछने लगे. जब वृद्धा ने बूटीवाला पर्वत दिखाया तो हनुमान जी ने उस पर्वत के काफी बड़े हिस्से को तोड़ा और पर्वत को लेकर उड़ते बने. बताते हैं कि जिस वृद्धा ने हनुमान की मदद की थी उसका सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया था. आज भी इस गांव के आराध्य देव पर्वत की विशेष पूजा पर लोग महिलाओं के हाथ का दिया नहीं खाते हैं और न ही महिलाएं इस पूजा में मुखर होकर भाग लेती हैं.

COMMENTS

WORDPRESS: 0
DISQUS: 0