दिवाली 2018: जानिए पूजन का शुभ मुहूर्त, आवश्यक सामग्री और पूजा की विधि

दिवाली 2018: जानिए पूजन का शुभ मुहूर्त, आवश्यक सामग्री और पूजा की विधि

दिवाली के दिन भगवान श्री राम 14 वर्ष के बनवास के बाद अयोध्या लौटे थे. उनके आने की ख़ुशी में ही ये दीपों का त्यौहार मनाया जाता है. इस दिन माँ लक्ष्मी जी...

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दिवाली के दिन भगवान श्री राम 14 वर्ष के बनवास के बाद अयोध्या लौटे थे. उनके आने की ख़ुशी में ही ये दीपों का त्यौहार मनाया जाता है. इस दिन माँ लक्ष्मी जी, भगवान गणेश जी और माँ सरस्वती जी की पूजा की जाती है. भगवान गणेश जी को बल-बुद्धि के देवता माना जाता है. माँ लक्ष्मी जी को धन का और माँ सरस्वती जी को विद्या की देवी माना जाता है. इसलिए इस दिन इन सभी की पूजा करने का विधान है.पूजन का शुभ मुहूर्त

माँ लक्ष्मी जी की पूजा करने से पहले भगवान गणेश जी की पूजा करें. उन्हें स्नान कराएँ और वस्त्र, गंध, पुष्प और अक्षत अर्पित करें. उसके बाद माँ लक्ष्मी जी का पूजन प्रारम्भ करें. माता लक्ष्मी की चांदी, पारद या स्फटिक की प्रतिमा का पूजन से भी उत्तम फल की प्राप्ति होती है. जिस मूर्ति में माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है. उसे अपने पूजा घर में स्थान दें. मूर्ति में माता लक्ष्मी आवाहन करें. आवाहन यानी कि बुलाना. माता लक्ष्मी को अपने घर बुलाएं. माता लक्ष्मी को अपने-अपने घर में सम्मान सहित स्थान दें.

उसके बाद माँ लक्ष्मी की मूर्ति को स्नान कराएं. स्नान पहले जल से फिर पंचामृत से और दोबारा जल से स्नान कराएं. माँ लक्ष्मी जी को वस्त्रादि अर्पित करें. उन्हें आभूषण पहनाएं. फिर उनका श्रृंगार पूरा करके सुगंध और इत्र अर्पित करें. अब उन्हें कुमकुम तिलक करें. अब धूप व दीप अर्पित करें. माता लक्ष्मी को गुलाब के फूल विशेष प्रिय है. बिल्वपत्र और बिल्व फल अर्पित करने से भी महालक्ष्मी की प्रसन्नता होती है.

माँ लक्ष्मी जी को पूजन के दौरान 11 या 21 चावल ( ध्यान दें एक भी चावल का दाना खंडित ना हो) अर्पित करें. श्रद्धानुसार घी या तेल का दीपक लगाएं. देवी लक्ष्मी की पूजा के ल‌िए दीपक की बाती का रंग लाल होना चाहिए. दीपक को दाईं ओर रखें. दीपक बाईं ओर नहीं रखना चाह‌िए. आरती के बाद उन्हें नेवैद्य अर्पित करें. महालक्ष्मी पूजन के दौरन ‘ऊँ महालक्ष्मयै नमः’ इस मंत्र का जप करते रहें.पूजन का शुभ मुहूर्त

इस दिन माँ लक्ष्मी जी के पूजन का शुभ मुहूर्त इस प्रकार है. लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त: शाम 17:57 से 19:53 तक है जबकि प्रदोष काल: शाम 17:27 बजे से 20:06 बजे तक और वृषभ लग्न: 17:57 बजे से 19:53 बजे से तक रहेगा.

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