दिवाली की रात लक्ष्मी पूजन के बाद क्यों बनाया जाता है जादुई काजल, जानिए इसका रहस्य

दिवाली की रात लक्ष्मी पूजन के बाद क्यों बनाया जाता है जादुई काजल, जानिए इसका रहस्य

पूरी दुनिया में दिवाली की धूम छाई हुई है. भारत सहित हिन्दू बहुल देशों में तो दिवाली का जश्न और भी जोरों पर है. घरों को सजाने से लेकर रंगोली तक की तैया...

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पूरी दुनिया में दिवाली की धूम छाई हुई है. भारत सहित हिन्दू बहुल देशों में तो दिवाली का जश्न और भी जोरों पर है. घरों को सजाने से लेकर रंगोली तक की तैयारियां लगभग सम्पूर्ण हो चुकी है. दिवाली की रात लक्ष्मी-गणेश जी की ख़ास पूजा के लिए आवश्यक सामग्री को इक्कट्ठा किया जा रहा है. कई जगहों पर इस दिन एक ख़ास परम्परा के तहत काजल बनाने का प्रचलन है.काजल

इस दिन लक्ष्मी-गणेश जी की पूजा के बाद पूजा में उपयोग किये गए मुख्य दीपक से काजल बनाया जाता है. उस काजल को घर की महिलाएं घर के सभी सदस्यों को लगाती है. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक काजल यानी काला टिका हमेशा से ही बुरी और नकारात्मक शक्तियों से बचाने में अहम माना जाता है.

कहा जाता है कि दिवाली की रात भी पूजा के दीपक से बनाया हुआ काजल लगाने से बुरी नज़र नहीं लगती और घर की सुख समृ्द्धि कोई रुकावट पैदा नहीं होती. इसीलिए तिजोरी, घर का चूल्हा, दरवाज़ों आदि पर भी काला टीका लगाया जाता है. इसके अलावा घर में कार, बाइक या जो भी वाहन हो उसे भी काला टिका लगाया जाता है.काजल

अगर इस परम्परा के पीछे वैज्ञानिक कारण की बात की जाये तो दिवाली के दौरान वातावरण में प्रदुषण बहुत हो जाता है. पटाखों से निकला धुआं भी आँखों के लिए बहुत नुकसानदायक होता है. कई बार इस धुएं की वजह से किसी की आंखों में जलन होने लग जाती है और आँखे लाल होने लगती हैं, तो किसी की आंखों से पानी निकलने लगता है. धुंए के बुरे असर को बेअसर करने के लिए काजल बहुत उपयोगी माना जाता है. इसीलिए भी दिवाली की रात को घर का बना हुआ कैमिकल फ्री काजल लगाना अच्छा माना जाता है.

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