दिवाली पर पटाखों की बिक्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दिया ये आदेश

दिवाली पर पटाखों की बिक्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दिया ये आदेश

दीवाली से ठीक पहले पटाखों के बैन पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि देश में पटाखों पर पूरी तरह बैन नहीं लगाया जा सकत...

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दीवाली से ठीक पहले पटाखों के बैन पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि देश में पटाखों पर पूरी तरह बैन नहीं लगाया जा सकता है. कोर्ट ने कहा कि सुरक्षित और ग्रीन पटाखों का निर्माण और बिक्री पहले की तरह ही जारी रहेगी. दिवाली पर पटाखों की बिक्री को लेकर लगाई गई याचिका पर जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने यह फैसला सुनाया है.दिवाली पर पटाखों की बिक्री

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पटाखों की बिक्री केवल लाइसेंस धारक ही कर सकेंगे. हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा की पटाखों की ऑनलाइन बिक्री पर रोक जारी रहेगी. अगर फिर भी कोई पटाखों की ऑनलाइन बिक्री करता है तो उसके खिलाफ कोर्ट की अवमानना का केस दर्ज़ होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘किसी भी धार्मिक त्यौहार या शादी के मौके पर केमिकल वाले पटाखों का प्रयोग नहीं किया जायेगा. वहीँ, एक निश्चित डेसिबल की आवाज निकलने वाले पटाखे ही जलाये जा सकते है.’दिवाली पर पटाखों की बिक्री

कोर्ट ने पूरे देश के लिए दीवाली पर पटाखे जलाने की टाइम लिमिट तय कर दी है. कोर्ट ने कहा कि दीवाली के दिन रात 8 से 10 बजे तक पटाखे फोड़े जाएंगे. वहीं नए साल और क्रिसमस के मौके रात 11:55 से 12:30 बजे तक ही पटाखे फोड़े जा सकते हैं.

आपको बता दें कि साल 2017 में दिवाली से ठीक पहले सर्वोच्च न्यायालय ने पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया था. हालाँकि, सबसे बड़ी अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि कुछ शर्तों के साथ पटाखों की बिक्री एक नवंबर, 2017 यानी दिवाली गुजर जाने के बाद फिर से की जा सकेगी.

दिवाली पर पटाखो की बिक्री पर बैन लगाने की याचिका कुछ बच्चों की ओर से दाखिल की गई थी. याचिका लगाने वाले बच्चों के फेफड़े ठीक ढंग से विकसित ना होने का कारण उनकी ओर से प्रदुषण को जिम्मेदार मानते हुए पटाखों की बिक्री पर रोक लगाने की अपील की गई थी.दिवाली पर पटाखों की बिक्री

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि प्रतिबंध से जुड़ी याचिका पर विचार करते समय पटाखा उत्पादकों के आजीविका के मौलिक अधिकार और देश के 1.3 अरब लोगों के स्वास्थ्य अधिकार समेत विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखना होगा.