धारा 377 को सुप्रीम कोर्ट ने किया खत्म, जानिये क्या था ये क़ानून और इसकी सज़ा

धारा 377 को सुप्रीम कोर्ट ने किया खत्म, जानिये क्या था ये क़ानून और इसकी सज़ा

भारत में अब समलैंगिकता को मिली कानूनी मंजूरी

सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्‍यों की संवैधानिक पीठ ने समलैंगिकता के मुद्दे पर फैसला सुनाते हुए एकमत से आईपीसी की धारा 377 के उन प्रावधानों को अवैध करार दिया...

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धारा 377 सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्‍यों की संवैधानिक पीठ ने समलैंगिकता के मुद्दे पर फैसला सुनाते हुए एकमत से आईपीसी की धारा 377 के उन प्रावधानों को अवैध करार दिया है. इस फैसले के साथ ही अब समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है. अब नए फैसले के मुताबिक समलैंगिकता अपराध नहीं है. यह मानसिक विकृति नहीं बल्कि पूरी तरह से सहज दशा है.

हालाँकि कोर्ट ने कहा है की धारा 377 के अंतर्गत पशुओं और बच्चों के संबंध में अप्राकृतिक संबंधों को अभी अपराध की श्रेणी में रखा गया है और इनके प्रावधान में किसी भी तरह से बदलाव नहीं किया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने अप्राकृतिक संबंधों के अपराध मानने वाली धारा 377 के अंश को तर्कहीन और सरासर गलत मानते हुए कहा की इसका बचाव किसी भी सूरत में नहीं किया जा सकता.धारा 377

आपको बता दें की करीब 158 साल पुरानी इंडियन पैनल कोड की धारा 377 के अंतर्गत परस्पर दो बालिगों की सहमती से बनाये गए अप्राकृतिक यौन संबंध को अपराध की श्रेणी में माना जाता था. वहीँ, पशुओं और बच्चों से संबंधित अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने को भी अपराध की श्रेणी में रखा गया था जिनमें अभी भी कोई बदलाव नहीं किया गया है और ये प्रावधान यथावत बने रहेंगे और अपराधियों को अपराध की गंभीरता के हिसाब से दण्डित किया जायेगा.

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