हर साल स्वाहा होते किसान के सपने, सरकार की दूकान में नहीं है आगजनी की मलहम पट्टी

हर साल स्वाहा होते किसान के सपने, सरकार की दूकान में नहीं है आगजनी की मलहम पट्टी

सरकार के तमाम दावों और वादों के बावजूद हर साल किसानों की हज़ारों एकड़ पककर कटने को तैयार खड़ी गेहूं की फसल आगजनी की भेंट चढ़ जाती है. अप्रैल आते-आते क...

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सरकार के तमाम दावों और वादों के बावजूद हर साल किसानों की हज़ारों एकड़ पककर कटने को तैयार खड़ी गेहूं की फसल आगजनी की भेंट चढ़ जाती है. अप्रैल आते-आते किसान का हलक सूखने लगता है कि ना जाने कब और किसके खेत आग की भेंट चढ़ जाये. अगर इस साल की ही बात की जाए तो प्रदेश में अब तक सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब दो हज़ार एकड़ गेहूं की खड़ी फसल जलकर राख हो गई और इसी के साथ राख हो गए उन किसानों के सपने भी, जो उन्होंने गेहूं की फसल को लेकर देखे थे.

सिसकती साँसों और भीगी आँखों की बस आखिरी उम्मीद रह जाती है सिर्फ सरकार की ओर से मिलने वाली मुआवजा राशि (प्रति एकड़ 12 हजार रुपए) की. वो भी सरकार की मर्ज़ी पर निर्भर करता है की कब मिलेगी. क्योंकि पिछले साल आगजनी की घटनाओं का मुआवजा सरकार ने कल यानी 20 अप्रैल को जारी किया है. ऐसे में किसान के पास शिवाय भूखों मरने के कोई विकल्प नहीं बचता क्योंकि प्रदेश के अधिकतर किसानों की माली हालत बहुत खराब है.

आपको बता दें की सरकार ने किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से फसलों होने वाले नुकसान की भरपाई हेतु प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की है. लेकिन उसका किसानों को कोई ख़ास फायदा नहीं मिल पा रहा है. सरकार ने उसके लिए ऐसी शर्तें रख दी है जिससे किसान के पल्ले केवल प्रीमियम भरना ही रह जाता है और ना ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में गेहूं में हुई आगजनी की घटना को कवर किया जाता है. जबकि किसानों को सबसे ज्यादा नुक्सान ही आगजनी की घटनाओं से होता है. फिर भी मुआवजा के नाम पर किसानों को सरकारी कार्यालयों में इतने चक्कर कटवाए जाते हैं की किसान मन मसोसकर घर बैठ जाता है.

पिछले साल (2017) सरकार द्वारा आगजनी की घटनाओं में 12 हजार रुपए प्रति एकड़ का मुआवजा देने की घोषणा की गई थी. जबकि किसानों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से प्रति एकड़ करीब 40 हज़ार रूपए का नुक्सान हो जाता है. ऐसी स्थिति में 12 हज़ार रूपए से फसल पर लागत खर्च भी पूरा नहीं हो पाता है. इसके लिए भी किसान को केस करना पड़ता है और केस जीतने की स्थिति में ही मुआवजा मिल पाता है.

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कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉक्टर गिरिश नागपाल के अनुसार सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत सरकार फसल का बीमा करती है जिसमें किसानों को ओलावृष्टि होने पर मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, जलभराव होने पर फिजिकल वेरिफिकेशन के बाद और लैंड स्लाइडिंग में मुआवजा दिया जाता है, लेकिन गेहूं में आगजनी को बीमा के अंतर्गत कवर नहीं किया गया है.

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