एक साल में दो लाख तौलिये, 82000 चादरें और 56000 तकिये चोरी, हर साल होता है करोड़ों का नुकसान

एक साल में दो लाख तौलिये, 82000 चादरें और 56000 तकिये चोरी, हर साल होता है करोड़ों का नुकसान

इंडियन रेलवे को यात्रियों को दी गई सुविधा का हर्जाना करोंड़ों में भुगतना होगा. दरअसल, रेलवे को तौलिया, चादरें और तकिये जैसी चीजें चोरी होने से करोड़ों र...

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इंडियन रेलवे को यात्रियों को दी गई सुविधा का हर्जाना करोंड़ों में भुगतना होगा. दरअसल, रेलवे को तौलिया, चादरें और तकिये जैसी चीजें चोरी होने से करोड़ों रूपए की चपत लगी है. अगर बात की जाये सिर्फ पिछले साल की तो केवल एक साल के दौरान ही यात्रियों ने करीबन 1.95 लाख तौलिये चुरा लिए.इंडियन रेलवे

यही नहीं विभिन्‍न ट्रेनों से 81 हजार 736 चादरें, 55 हजार 573 तकिया कवर, 5 हजार 38 तकिया और 7 हजार 43 कंबल भी चोरी हो गए. अनुमान के मुताबिक 3 साल में रेलवे को इस चोरी से करीब 4 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है.

वेस्ट रेलवे का ने कहा कि एक साल के समय के दौरान 200 टॉयलेट मग, एक हज़ार से भी अधिक नल टैप और 300 के लगभग फ्लश पाइप चोरी हो जाते है. वहीँ, मध्य रेलवे में केवल 6 महीने में ही 79 हजार से अधिक तौलिए, 27 हजार चादरें, 21 हजार 50 तकिया कवर, 2 हजार 150 तकिया और 2 हजार 65 कंबल चुरा लिए गए.

हालांकि रेलवे बोर्ड ने कुछ माह पहले एक आदेश जारी किया था जिसके मुताबिक एसी डिब्बों में यात्रा करने वाले यात्रियों को जो फेस टॉवेल दिए जाते हैं उनकी जगह पर अब सस्ते, छोटे और एक बार इस्तेमाल योग्य नेपकिन दिए जाएंगे. इसी क्रम में कुछ महीने पहले रेलवे बोर्ड ने एसी डिब्बों में यात्रा करने वालों को नायलॉन के कंबल उपलब्ध कराने का सभी जोनों को आदेश दिया था और अब कॉटन के बिना बुनाई वाले फेस टॉवल देने को कहा है.

इंडियन रेलवे

सरकार का कहना है की फेस टॉवल पर महज साढ़े तीन रूपए का खर्च आता है. सरकार की ओर से सभी इंडियन रेलवे जोन के महाप्रबन्धक को पत्र भेजकर कहा गया है कि नए नैपकीन पर खर्चा कम आएगा क्योंकि उन्हें थोक के भाव में खरीदा जा सकता है और वो आकार में भी छोटे होते हैं. AC क्लास में यात्रा करने वालों को बेडरोल की कीमत चुकानी होगी.

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