हरितालिका तीज: पति की दीर्घायु के लिए सुहागिनें करती है इतना कठिन व्रत, जानें इसके नियम

हरितालिका तीज: पति की दीर्घायु के लिए सुहागिनें करती है इतना कठिन व्रत, जानें इसके नियम

हिन्दू धर्म में बहुत से व्रत और त्यौहारों का वर्णन मिलता है जिनमें से कुछ व्रत और त्यौहारों की ख़ास तौर पर महिलाओं के लिए विशेष मान्यता है. कुछ त्यौहार...

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हिन्दू धर्म में बहुत से व्रत और त्यौहारों का वर्णन मिलता है जिनमें से कुछ व्रत और त्यौहारों की ख़ास तौर पर महिलाओं के लिए विशेष मान्यता है. कुछ त्यौहार जहाँ महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देते है वहीँ कोई त्यौहार बच्चों को दीर्घायु. हिन्दू धर्म में हरितालिका तीज का अपना विशेष महत्व है. हरितालिका तीज देवाधिदेव महादेव और माता गौरी को समर्पित त्यौहार है और ऐसी मान्यता है की इस व्रत के प्रताप से सुहागिनों का सुहाग अखंड रहता है और कुँवारी लड़कियों को मनचाहा वर मिलता है.हरितालिका तीज

उत्तर भारत में इसे हरितालिका तीज के नाम से जाना जाता है जबकि दक्षिण में इसे गौरी हब्बा के नाम से जाना जाता है. हिन्दू पंचांग के अनुसार हरितालिका तीज हर साल भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. इस बार हरितालिका तीज अंग्रेजी कैलंडर के अनुसार 12 सितम्बर को पड़ रही है.

यह व्रत जितना फलदायी है उतने ही कठिन इसके नियम भी हैं. हरितालिका तीज का व्रत और इसके नियम बेहद कठिन है. इस व्रत के नियम हरियाली तीज और कजरी तीज के व्रत से भी ज्‍यादा कठोर हैं. कहा जाता है की पुरे नियम कायदे से अगर इस व्रत को किया जाए तो इसके फायदे अचंभित करने वाले होते है. आज हम आपको इस व्रत के नियम और पूजा विधान और शुभ मुहूर्त के बारे में बताने जा रहे हैं.

हरितालिका तीज व्रत के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 6: 15 मिनट से शुरू होकर सुबह 8: 00 तक रहेगा. वहीँ, शाम के पूजन का शुभ समय 7: 00 बजे से लेकर 8: 00 तक है.हरितालिका

हरतालिका तीज की पूजा को करना जितना कठिन है, उतना ही कठिन है इसका व्रत रखना. पुराणों के मुताबिक  इस व्रत के दौरान महिलाएं बिना पानी के 24 घंटे तक निर्जल रहकर व्रत रखती हैं. कुछ विशेष स्थिति में अगर तृतीया तिथि का समय 24 घंटे से ज्यादा का रहता है तो इस व्रत की अवधि भी बढ़ जाती है.

इस दिन व्रत रखने वाली महिलायें पुरे समय के दौरान निराहार और निर्जल रहती है. सबसे पहले व्रत करने वाली युवतियों और महिलाओं को सुबह जल्दी उठकर स्नान करके भगवान भोलेनाथ की पूजा करनी होती है. महिलाएं और युवतियां भगवान शिव को गंगाजल, दही, दूध और शहद से स्नान कराकर उन्हें फल चढ़ाती हैं और पति की लंबी आयु की कामना करती हैं.

हरितालिका तीज पर पूजा पाठ के लिए थाली सजायें और भगवान की पूजा के लिए शिव के लिए यथासंभव आवश्यक सामग्री का प्रबंध करें. थाली में गीली काली मिट्टी या बालू रेत, बेलपत्र, शमी पत्र, केले का पत्ता, धतूरे का फल एवं फूल, अकांव का फूल, तुलसी, मंजरी, जनैव, नाडा, वस्त्र, सभी प्रकार के फल एवं फूल, फुलहरा (प्राकृतिक फूलों से सजा) जबकि मां पार्वती के लिए सभी तरह की सुहाग सामग्री मेहंदी, चूड़ी, बिछिया, काजल, बिंदी, कुमकुम, सिंदूर, कंघी, माहौर, बाजार में उपलब्ध सुहाग पुड़ा आदि, श्रीफल, कलश, अबीर, चन्दन, घी-तेल, कपूर, कुमकुम, दीपक, घी, दही, शक्कर, दूध, शहद पंचामृत के लिए आदि का बंदोबस्त पहसे से ही करके रखें. फिर नियम पूर्वक भगवान गौरीशंकर की पूजा आराधना करें.हरितालिका

इस व्रत में सोने की मनाही है. यहां तक कि रात को भी सोना वर्जित है. रात के वक्‍त भजन-कीर्तन किया जाता है जबकि दिन में मेहंदी लागाकर और धार्मिक पुस्तकें पढ़कर समय का सदुपयोग किया जा सकता है. दुसरे दिन यानी व्रत अगले दिन सूर्योदय के बाद माता पार्वती को सिंदूर चढ़ाने के बाद ही व्रत को तोड़ा (खोला) जाता है.

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