पढ़ें: ढ़ाई दिन के सीएम येदियुरप्पा से कुर्सी की आँख मिचौनी और किस्मत का खेल

पढ़ें: ढ़ाई दिन के सीएम येदियुरप्पा से कुर्सी की आँख मिचौनी और किस्मत का खेल

कर्नाटक में चार दिन से चल रहे नाटक का अंत तीसरी बार सीएम बने येदियुरप्पा द्वारा बहुमत ना जुटा पाने और इस्तीफा देने के साथ ही हो गया. मात्र ढ़ाई दिन की ...

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कर्नाटक में चार दिन से चल रहे नाटक का अंत तीसरी बार सीएम बने येदियुरप्पा द्वारा बहुमत ना जुटा पाने और इस्तीफा देने के साथ ही हो गया. मात्र ढ़ाई दिन की सीएम रहे यदियुरप्पा ने गुरूवार को सीएम पद की शपथ ली थी, लेकिन शनिवार को विधानसभा पहुंचकर भावुक भाषण दिया और इस्तीफे का एलान कर दिया.

आपको बता दें कि पहली बार येदियुरप्पा 2007 में सीएम बने थे. लेकिन किस्मत के खेल के आगे उन्हें सात दिन बाद ही अपनी कुर्सी छोड़नी. बीएस येदियुरप्पा जनता दल-सेक्‍युलर के समर्थन से 2007 में पहली बार कर्नाटक के सीएम बने थे. 12 नवंबर 2007 को सीएम पद की शपथ लेने के बाद 19 नवंबर 2007 को उन्‍होंने पद से इस्‍तीफा दे दिया था.

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2008 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी एक बड़ी पार्टी बनकर उभरी. 30 मई 2008 को सात दिन के सीएम बीएस येदियुरप्पा ने एक बार सीएम पद की शपथ ली. हालाँकि 2008 में भी बीजेपी को बहुमत के लिए 3 सीटें कम पड़ रही थी. लेकिन 3 साल और दो महीने के बाद भ्रष्‍टाचार के आरोप लगने पर उन्‍हें पद से इस्‍तीफा देना पड़ा. 2011 में पद छोड़ने के बाद येदुरप्‍पा को बीजेपी से उम्मीद के अनुसार सपोर्ट नहीं मिला तो येदियुरप्पा ने पार्टी के खिलाफ ही बगावत का बिगुल बजा दिया. उन्‍होंने कर्नाटक जनता पक्ष नाम से नई पार्टी भी बना ली.

2014 में लोकसभा चुनावों से ठीक पहले येदुरप्पा ने अपनी पार्टी का विलय बीजेपी में करा दिया. लोकसभा चुनाव में येदुरप्‍पा शिमोगा से चुनाव लड़े और विपक्षी उम्‍मीदवार को करीब साढ़े तीन लाख वोटों से पटखनी दी. इन चुनावों में येदुरप्पा की वापसी से बीजेपी को बहुत फायदा हुआ. अगर 2018 की बात करें तो बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी है, लेकिन इस बार भी बीजेपी बहुमत से 8 सीट दूर रह गई.

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आश्चर्य की बात यह रही कि येदुरप्‍पा ने 2018 चुनाव के नतीजे आने से पहले ही कह दिया था कि वह 17 मई को सीएम पद की शपथ ले लेंगे. हकीकत में भी ऐसा ही हुआ, राज्यपाल ने उन्‍हें 17 मई को शपथ का न्‍योता भेजा और येदुरप्‍पा ने गुरुवार को मुख्यमंत्री पद की तीसरी बार शपथ ली.परंयु हर बार की तरह किस्मत ने एक बार फिर उनके साथ आँख-मिचौनी का खेल खेला और वह ढाई दिन के ही सीएम रह सके. शनिवार को उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा.

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