होली विशेष: जानिये क्या होता है होलाष्टक? क्यूँ नहीं करते इन दिनों शुभ कार्य- जानिए पूरी जानकारी यहाँ

होली विशेष: जानिये क्या होता है होलाष्टक? क्यूँ नहीं करते इन दिनों शुभ कार्य- जानिए पूरी जानकारी यहाँ

फागुन माह की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला होली का त्यौहार भारत के प्रमुख त्यौहारों में से एक है. इस साल यह त्यौहार 1 और 2 मार्च को मनाया जायेगा. होली स...

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फागुन माह की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला होली का त्यौहार भारत के प्रमुख त्यौहारों में से एक है. इस साल यह त्यौहार 1 और 2 मार्च को मनाया जायेगा. होली से आठ दिन पहले अर्थात फागुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से शुरू हो जाता है होलाष्टक. होलाष्टक एक प्रकार से होली का पूर्व सूचक ही होता है और इसी दिन से ही होलिका दहन की तैयारियां भी शुरू कर दी जाती है.

होली और अष्टक नामक दो शब्दों से मिलकर बने होलाष्टक शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है होली के आठ दिन. इस आठ दिनों की गिनती फागुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से शुरू होकर होलिका दहन तक की जाती है, शायद अष्टमी तिथि से शुरू होने की वजह से ही होलाष्टक कहा जाता हो. माना जाता है कि होलाष्टक के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता क्योंकि इसके दौरान सौरमंडल के सभी ग्रह उग्र स्वभाव में रहते है. होलाष्टक प्रारम्भ होने पर होलिका दहन के लिए निर्धारित की गई जगह को गाय के गोबर से लीपकर गंगाजल छिडकें, फिर लकड़ी के रूप में होलिका और प्रह्लाद की स्थापना करें. इसके अलावा होलिका दहन तक अन्य शुभ कार्य वर्जित कहे गए हैं.

होलाष्टक के आठ दिनों में प्रथम दिन चंद्रमा, दुसरे दिन सूर्य, तीसरे दिन शनि, चौथे दिन शुक्र, पांचवें दिन गुरु और छ्टे, सातवें और आठवें दिन क्रमशः बुध, मंगल और राहू उग्र स्वभाव में रहते हैं. ज्योतिष के अनुसार इस दौरान मनुष्य अपने विवेक और बुद्धि से सही निर्णय ले पाने में अपेक्षाकृत कमजोर रहता है. इस दौरान लिए गए फैसले से हानिकारक परिणाम आने की संभावनाएं अधिक रहती है.

ज्योतिष के अनुसार इस आठ दिनों में विवाह, गृहप्रवेश, निर्माण कार्य का शुभारम्भ और गर्भाधान तथा नामकरण जैसे शुभ कार्यों को नहीं करना चाहिए. ज्योतिष की दृष्टि से होलाष्टक के आठ दिनों को अशुभ माना जाता है. 23 फरवरी से शुरू होने वाले होलाष्टक 1 मार्च को समाप्त हो रहे हैं. कहा जाता है कि भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद को उसके पिता हिरण्यकश्यप ने होली से पहले इन आठ दिनों में मारने के तमाम असफल प्रयास किये थे. इन्ही आठ दिनों में हिरण्यकश्यप ने क्रूरता की सभी सीमाएं पार करते हुए प्रह्लाद को जघन्य कष्ट दिए थे. इन्ही सब कारणों से हिन्दू धर्म में होलाष्टक के आठ दिनों को अशुभ माना जाता है और कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता.

 

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