इस दिवाली चीन का निकलने वाला है दिवाला, जानिए कैसे?

इस दिवाली चीन का निकलने वाला है दिवाला, जानिए कैसे?

डोकलाम विवाद और आतंक के आका पाकिस्तान का साथ देने के कारण भारतीय बाज़ार से दूर होता चीन इस बार भी भारतीय ग्राहकों को लुभाने में कमजोर साबित हो रहा है....

फारुक अब्दुल्ला के बिगड़े बोल, फिर बताया पीओके को पाकिस्तान का हिस्सा
धर्म संसद में हो गया निर्णय, अब इस दिन मनाया जायेगा दशहरा का पर्व
दिवाली पर पटाखों की बिक्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दिया ये आदेश

डोकलाम विवाद और आतंक के आका पाकिस्तान का साथ देने के कारण भारतीय बाज़ार से दूर होता चीन इस बार भी भारतीय ग्राहकों को लुभाने में कमजोर साबित हो रहा है. आम उपभोक्ता चाइनीज उत्पादों से दुरी बना रहा है. पिछली साल भी दिवाली के मौके पर चाइना के खिलाफ स्वदेसी उत्पाद इस्तेमाल करने का कैम्पेन चला था, जो इस बार जोर पकड़ता दिख रहा है.
इस साल दिवाली पर भारतीय विनिर्माता भी चीन की लड़ियों या झालरों को चुनौती देने के लिये बाजार में उतर आये हैं. माना जा रहा है कि इससे लड़ियों, एलईडी बल्ब और डेकोरेटिव लाइटों के बाजार पर ‘ड्रैगन’ का दबदबा कुछ कम होगा, हालांकि, कीमतों के मोर्चे पर चुनौती बरकरार है. हालांकि ग्राहकों का रुझान भी स्वदेशी उत्पादों के इस्तेमाल पर ज्यादा है.दिवाली

व्यापारियों के अनुसार पिछले साल दिवाली पर चीनी सामान के बहिष्कार का अभियान चलने से चीन की लड़ियों की बिक्री करीब 20 प्रतिशत तक कम हुई थी. इस साल भी डोकलाम विवाद के मद्देनज़र व्यापारियों ने पहले से सावधानी बरतते हुए चाइनीज लड़ियों और अन्य लाइटिंग उत्पादों का आयात कम किया है. स्थिति को भांपते हुए कई स्थानीय विनिर्माताओं ने भी बाजार में देश में बनी लड़ियों, बिजली वाली मोमबत्ती और दीये उतार दिए हैं.

देश के प्रमुख थोक बाजार सदर बाजार के व्यापारियों के मुताबिक चीन से आयात के लिए चार-पांच महीने पहले ऑर्डर देना पड़ता है. और इस बार लंबे समय से डोकलाम विवाद की वजह से उन्होंने माल अटकने की आशंका में काफी कम ऑर्डर दिए हैं. यही नहीं पिछले साल चीन से आयात किया गया काफी माल बच गया था, जिसे वे अबकी दिवाली खपाने का प्रयास करेंगे. जबकि माल की बिक्री कम होने से व्यापारीयों में चिंता साफ़ दिखाई पड़ रही है.
व्यापारियों के मुताबिक पिछले साल चीन के सामान के बहिष्कार को लेकर अभियान की वजह से चाइनीज लड़ियों की मांग 20 प्रतिशत तक घटी थी, इस बार इसमें 50 प्रतिशत तक कमी आने के आसार हैं. उनका कहना हैं कि पिछले साल व्यापारियों ने थोक में चाइनीज उत्पादों का आयात किया था, लेकिन बहिष्कार की वजह से उनका काफी माल निकल नहीं पाया था. हालांकि, इसके साथ ही उनका यह भी कहना है कि कीमतों के मामले में आज भी भारतीय विनिर्माता चीन का मुकाबला करने की स्थिति में नहीं हैं, जिससे कारोबारियों को चाइनीज लड़ियां और अन्य लाइटिंग उत्पाद बेचने पड़ते हैं.

COMMENTS