Holi 2019: जानिए क्यों मनाई जाती है होली और क्या है इसकी पौराणिक कथा

Holi 2019: जानिए क्यों मनाई जाती है होली और क्या है इसकी पौराणिक कथा

फागुन माह के साथ ही रंगों के त्यौहार होली की तैयारियां शुरू हो जाती है. इस बार हिंदू कैलेंडर के हिसाब से होलिका दहन 20 मार्च (बुधवार) और बड़ी होली 21 ...

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फागुन माह के साथ ही रंगों के त्यौहार होली की तैयारियां शुरू हो जाती है. इस बार हिंदू कैलेंडर के हिसाब से होलिका दहन 20 मार्च (बुधवार) और बड़ी होली 21 मार्च (गुरुवार) को मनाई जाएगी. होली के आठ दिन पहले होलाष्टक शुरु हो जाते हैं और होलिका दहन के साथ ही ये खत्म हो जाते हैं. हिन्दू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक होलाष्टक के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है. होली का त्यौहार भारत ही नहीं अपितु विदेशों में भी बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है.holi ki pauranik kahani

शास्त्रों के अनुसार पहले दिन होलिका दहन होता है और दुसरे दिन धुलंडी यानि रंग खेला जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं की होलिका दहन क्यूँ किया जाता है और इसके पीछे क्या इतिहास है? अगर नहीं जानते तो आज हम आपको बताते हैं की होलिका दहन के पीछे क्या पौराणिक कथा प्रचलित है?

कहते है की प्राचीन काल में अत्याचारी हिरण्यकश्यप ने तपस्या कर भगवान ब्रह्मा से अमर होने का वरदान पा लिया था. उसने ब्रह्मा जी से वरदान में मांगा था कि उसे संसार का कोई भी जीव-जन्तु, देवी-देवता, राक्षस या मनुष्य रात या दिन में,  पृथ्वी पर या आकाश में, घर या बाहर न मार सके सके. ब्रह्मा जी से वरदान पाते ही वह निरंकुश हो गया. हिरण्यकश्यप ने प्रजा पर अत्याचार शुरू कर दिए और भगवान की बजाए खुद की पूजा करने का दबाव बनाने लगा. समस्त प्रजा उसके अत्याचारों से त्राहि-त्राहि कर उठी.

उस दौरान परमात्मा में अटूट विश्वास रखने वाला प्रहलाद जैसा भक्त पैदा हुआ. प्रहलाद भगवान विष्णु का परम भक्त था और उसे भगवान विष्णु की कृपा-दृष्टि प्राप्त थी. हिरण्यकश्यप ने सभी को आदेश दिया था कि वह उसके अतिरिक्त किसी अन्य की स्तुति न करे लेकिन प्रहलाद नहीं माना. प्रहलाद के न मानने पर हिरण्यकश्यप ने उसे जान से मारने का प्रण लिया. हिरण्यकश्यप ने भक्त प्रहलाद को मारने के लिए अनेक उपाय किए लेकिन भगवान की कृपा से वह हमेशा बचता रहा.holi ki pauranik kahani

हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को अग्नि से बचने का वरदान प्राप्त था. हिरण्यकश्यप ने उसे अपनी बहन होलिका की मदद से आग में जलाकर मारने की योजना बनाई। और होलिका प्रहलाद को गोद में लेकर आग में जा बैठी. कुदरत की करनी हुई कि होलिका ही आग में जलकर भस्म हो गई और प्रहलाद बच गया. तभी से होली का त्यौहार मनाया जाने लगा.

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