धनतेरस: जानिए क्यूँ मनाया जाता है धनतेरस का त्यौहार, इसका महत्व और पूजा की विधि

धनतेरस: जानिए क्यूँ मनाया जाता है धनतेरस का त्यौहार, इसका महत्व और पूजा की विधि

भारत को अगर त्यौहारों का देश कहा जाये तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगा. प्राचीन समय से चले आ रहे इन त्यौहारों का अपना एक अलग और विशेष महत्व है. इन सबके पी...

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भारत को अगर त्यौहारों का देश कहा जाये तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगा. प्राचीन समय से चले आ रहे इन त्यौहारों का अपना एक अलग और विशेष महत्व है. इन सबके पीछे बहुत बड़ा इतिहास होता है और उनमें छिपा होता है मानव मात्र के लिए सन्देश. ऐसा ही एक त्योहार धनतेरस है. दिवाली से पहले धनतेरस पर पूजा का विशेष महत्व होता है. इस दिन धन और आरोग्य के लिए भगवान धन्वंतरि और कुबेर की पूजा की जाती है. इस साल धनतेरस 5 नंवबर को मनाया जाएगा.धनतेरस

शास्त्रों के अनुसार धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि का जन्‍म हुआ था. जब देवताओं और दानवों ने मिलकर  समुद्र मंथन किया और उस दौरान धन्वंतरी जी अपने साथ अमृत का कलश और आयुर्वेद लेकर प्रकट हुए थे, वो यही दिन था. इसी कारण से भगवान धन्वंतरि को औषधी का जनक भी कहा जाता है. ऐसा माना जाता है कि धनतेरस के दिन सोने-चांदी के बर्तन खरीदना भी शुभ होता है.धनतेरस

धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि और लक्ष्मी-गणेश जी की पूजा करने का विधान है. इनकी पूजा करने के लिए सबसे पहले एक लकड़ी का पाटा लें और उस पर स्वास्तिक का निशान बनाएं. उसके बाद पाटे पर तेल का दिया जलाकर रख दें और आस-पास गंगाजल की छीटें लगाए. उसके बाद दिए पर रोली और चावल का तिलक करते हुए भगवान धन्वंतरी जी को याद करें. दीपक में कुछ मीठा डालकर भोग धन्वंतरी जी को लगाएं फिर देवी लक्ष्मी और गणेश भगवान को कुछ पैसे और प्रसाद चढ़ाएं. दीपक का आर्शीवाद लेकर दिए को मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा में रखें.