कर्नाटक: सत्ता के खेल में कौन ले जा सकता है बाज़ी, क्या रोल है राज्यपाल का?

कर्नाटक: सत्ता के खेल में कौन ले जा सकता है बाज़ी, क्या रोल है राज्यपाल का?

कर्नाटक में 12 मई को हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद कर्नाटक की राजनीति में सियासी नाटक शुरू हो चुका है. 15 मई को घोषित नातोजों में बीजेपी 10...

महिलाओं की 7 अजब गजब सच्चाई जिन्हें वो खुद नहीं जानती
Maruti 800 के बाद कम्पनी बंद करने जा रही है सबकी पसंदीदा ये फेमस कार, बताई ये मज़बूरी
शरद पूर्णिमा: आज की रात आसमान से बरसेगा अमृत, जानिए क्या है इस रात्रि की खीर का रहस्य

कर्नाटक में 12 मई को हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद कर्नाटक की राजनीति में सियासी नाटक शुरू हो चुका है. 15 मई को घोषित नातोजों में बीजेपी 104 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. लेकिन बीजेपी अभी भी बहुमत के जादूई आंकड़े से आठ सीटें दूर रह गई है. बीजेपी के बाद दुसरे नंबर पर रही कांग्रेस ने 78 सीटें हासिल की है, जबकि 38 सीटों के साथ जेडीएस तीसरे नंबर पर रही है.

कर्नाटक में सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 112 का है जिसे बीजेपी तो हासिल से चूक गई लेकिन कांग्रेस ने ‘प्लान बी’ पर काम करते हुए बिना शर्त जेडीएस को समर्थन देते हुए जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनाने का ऑफर भी दे दिया. इसके बाद जेडीएस ने कांग्रेस के समर्थन में सर्कार बनाने का दावा पेश किया. उधर बीजेपी ने भी सबसे बड़े दल के नाते राज्यपाल वजुभाई वाला के सामने अपना दावा पेश कर दिया है.

यह भी पढ़ें: जिस रहस्य को 60 साल तक नहीं सुलझा पाए वैज्ञानिक भी, उसे सुलझा दिया बच्चों ने

अब ऐसी हालत में राज्यपाल को ये देखना होगा की कौन से विकल्प पर काम करने से राज्य में स्थिर सरकार बने. इसके लिए राज्यपाल सबसे बड़े दल को सरकार बनाने का न्यौता दे सकते हैं या जेडीएस और कांग्रेस के गठबंधन के आधार पर बनी बड़ी पार्टी को भी सरकार बनाने के लिए बहुमत सिद्ध करने के लिए कह सकते है. अगर राज्यपाल को लगे की किसी भी आधार पर स्थिर सरकार नहीं बन सकती तो उनके पास राष्ट्रपति शासन लागू करने का विकल्प मौजूद है.

अब कर्नाटक के सियासी नाटक में राज्यपाल पर निर्भर करता है कि वो किस पार्टी को बहुमत साबित करने का मौका देते हैं. संविधान के अनुसार मुख्यमंत्री के नियुक्ति के सवाल पर फैसला पूर्णरूप से राज्यपाल के अधिकार क्षेत्र में आता है. नियमों के अनुसार राज्यपाल अपने विवेक का प्रयोग ऐसे किसी भी व्यक्ति को मुख्यमंत्री नियुक्त कर सकते हैं जिसे उनके विचार में सदन का बहुमत हासिल होने की आशा हो. क्योंकि जो सरकार बनती है उसे विधानसभा के प्रति जिम्मेदार होना और बहुमत होना जरूरी है.

यह भी पढ़ें: देवगोड़ा-राज्यपाल-22 साल पुरानी बात, बीजेपी की फेसबुक पोस्ट का मजमून, कहा-वक्त फैसला करता है

अगर इतिहास पर नज़र डालें तो हम पाएंगे कि कहीं राज्यपाल ने सरकार बनाने के लिए सबसे बड़े दल को न्यौता दिया है तो कई जगहों पर चुनावों के बाद हुए गठबंधन के नेताओं को भी बुलाया है. इसके अलावा कई मामलों में चुनावों के बाद हुए गठबंधन के नेता को बहुमत सिद्ध करने के लिए कहा है.

COMMENTS