खतरनाक वायरस की चपेट में केरल, अब तक कई मौत, जानिए- निपह वायरस की जरूरी जानकारी

खतरनाक वायरस की चपेट में केरल, अब तक कई मौत, जानिए- निपह वायरस की जरूरी जानकारी

केरल में एक खतरनाक वायरस ने कहर बरपाया हुआ है. केरल के कोझीकोड जिले में ‘निपह’ वायरस की चपेट आने से अब तक छह लोगों की मौत हो गई है. कोझीकोड जिले के कल...

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केरल में एक खतरनाक वायरस ने कहर बरपाया हुआ है. केरल के कोझीकोड जिले में ‘निपह’ वायरस की चपेट आने से अब तक छह लोगों की मौत हो गई है. कोझीकोड जिले के कलेक्टर ने इस वायरस से हुई मौतों की पुष्टि करते हुए कहा की केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से गठित डॉक्टर्स की एक उच्च स्तरीय टीम को कोझीकोड भेजकर मामले की जांच करने के आदेश दिए गए हैं. इसके लिए एक मल्टी डिसिप्लीनरी टीम का गठन किया है.

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वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार निपह वायरस एक ऐसी बीमारी है जिसे जानवरों से इंसानों में पहुंचाया जा सकता है जिसे एक नए तरह का जूनोसिस कहा जाता है. इस वायरस की चपेट में आये व्यक्ति को एक्यूट रेस्पीरेटरी सिंड्रोम और प्राणघातक इन्सैफेलाइटिस हो सकता है जिसके लक्षण भी नज़र नहीं आते. डब्ल्यूएचओ ने कहा है की एनआईवी यानी निपह वायरस से सुअरों और दूसरे घरेलू जानवरों में भो गंभीर बिमारी हो सकती है.

इस वायरस को खतरनाक इसलिए भी माना जा रहा है की इसका अभी तक इंसान और जानवर, दोनों के लिए कोई टीका विकसित नहीं हुआ है. इसका प्राथमिक उपचार सघन सहायक देखभाल के जरिये ही किया जा सकता है. इस विषाणु के प्रसार के लिए फिलहाल चमगादड़ को मुख्य कारक माना जा रहा है. अगर किसी इलाके में इस वायरस का प्रकोप है तो किसी को भी उन जगहों पर जाने से बचना चाहिए जहाँ चमगादड़ रहते हैं.

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निपह वायरस का पहला मामला मलेशिया में 1998 में सामने आया था. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार सबसे पहले ये बिमारी सूअरों के जरिये सामने आई थी. भारत में इस वायरस का पहला मामला 2001 में पश्चिम बंगाल में सिल्लीगुड़ी में सामने आया था. इसके बाद 2007 में भी एक मामला और आया था.

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