बच्चों को ट्यूशन (tuition) देना सही है या गलत, पढ़कर करें फैसला?

बच्चों को ट्यूशन (tuition) देना सही है या गलत, पढ़कर करें फैसला?

Tuition: आज के समय में अधिक तकनिकी ज्ञान बढने से सेवाएं भी काफी मिल रहीं हैं. आज हर घर में टीवी और मोबाईल हैं ऐसे में घर पर रहकर बच्चों का पढना जैसे न...

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Tuition: आज के समय में अधिक तकनिकी ज्ञान बढने से सेवाएं भी काफी मिल रहीं हैं. आज हर घर में टीवी और मोबाईल हैं ऐसे में घर पर रहकर बच्चों का पढना जैसे न के बराबर होता जा रहा हैं. स्कूल में टीचर के कहे अनुसार, बच्चे पढ़ते है लेकिन जितना टीचर पढ़ना चाहते है उतने ध्यान से नहीं पढ़ते हैं. जैसे टीचर ने बच्चों को कुल चार प्रश्न याद करने के लिए दिए हैं तो बच्चे केवल तीन ही याद करते है क्योंकि उनकी सोच है की केवल इतने से काम चल जायेगा.

ऐसा करने से वो अच्छे नम्बरों से पास तो हो जाते हैं लेकिन टॉप तक नहीं पहुंच पाते है. इसके पश्चात उनकी शिकायत होती है की उन्हें सब याद था लेकिन नंबर नहीं आये हैं. जरूरी नहीं है की जो याद करें वो ही एग्जाम में आये, ऐसे में जरूरी होता हैं की बार-बार किसी विषय को पढने की बजाय उसे समझने का प्रयास करें.

स्कूल जैसा माहोल घर में बनाना हर किसी के लिए आसन नहीं होता हैं. घरों में कभी टीवी चलता है,कभी मेहमान आ जाते हैं, कभी मोबाईल पर समय चला जाता हैं, इसके अलावा भी घरों में छोटे-छोटे कार्य होते हैं उनके लिए बच्चों को जाने-अनजाने से कहा जाता हैं. ऐसे में पढ़ाई से ध्यान हट जाता हैं. ऐसे में जरूरत पड़ती है बच्चों के लिए tuition की.

बच्चों को खेलने-कूदने के लिए भी उचित समय मिलना भी जरूरी है क्योंकि मानसिक विकास के साथ-साथ शारीरिक विकास भी जरूरी है. ट्यूशन के लिए जितनी देर जाते है उनके मन में केवल पढने की इच्छा होती है. घरों में बच्चों का खेलने में ध्यान अधिक होता हैं. नादान बच्चों का अपने भविष्य की और कोई ध्यान नहीं जाता हैं, इसलिए माता-पिता उनकों पढने के लिए भेजते हैं.

बच्चे जब समझदार हो जाते है और यदि उनको समय पर किसी प्रकार की ट्यूशन नहीं दी जाती है तो वो पूरा इल्जाम माता और पिता पर डाल देते हैं. इसलिए बच्चों के बच्पन में माता-पिता की जिम्मेदारी होती है की वो खुद अथवा ट्यूशन (tuition) के जरिये बच्चों को अच्छी तरह से पढाए.

कई बार बच्‍चों को भीड़ में पढ़ाई समझ में नहीं आती है. ऐसे में यदि बच्चे ट्यूशन बढने लगे तो मास्‍टर से निजी ध्‍यान की प्राप्ति होगी और उसकी पढ़ाई की समस्‍याएं सुलझाई जा सकेंगी. यदि ऐसा होता है तो जाहिर-सी बात है की उसके अच्‍छे नंबर भी आएंगे.

ट्यूशन की कक्षा में बच्‍चों का आत्मसम्मान बढ़ जाता है. पढ़ाई के साथ पूरे समय जुडे़ रहने से उन्‍हें महसूस होता है की वो स्‍कूल की हर चुनौती का डट कर मुकाबला कर सकते हैं.

आज के समय में लगभग सभी जिम्मेदार माता-पिता कामकाजी होते हैं. मां अक्सर अपने घर के काम या अपनी जॉब के टाइम के बाद इतना अधिक समय नहीं बचा पाती जिसे बच्चों पर खर्च किया जा सके. और पिता, थक हार कर अपने ऑफिस या बिज़नस से केवल इतना ही निकाल पाता है की बस मामूली सा सुस्ता सके. उसके लिए बच्चों को समय ना दे पाना बहुत मुश्किल होता है. ऐसे में हर व्यस्त माँ-बाप चाहते है की बच्चों के लिए tuition रख ली जाये ताकि वो अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह भी कर ले और बच्चों को एक बेहतर शिक्षा भी दे पाए.

कृपया इस विषय पर अपनी राय जरुर दें, ताकि हर विचार आपके साथ सांझा किया जा सकें और आपको कीमती विचारों को भी दूसरों के साथ सांझा किया जा सके.

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