जानिए क्यों लगाया जाता है नन्दलाल को छप्पन भोग, कौन-कौन से आहार होते है और क्या है इसकी कहानी?

जानिए क्यों लगाया जाता है नन्दलाल को छप्पन भोग, कौन-कौन से आहार होते है और क्या है इसकी कहानी?

हम सब के प्‍यारे नटखट नंदलाल, राधा के श्‍याम और भक्‍तों के भगवान श्रीकृष्‍ण के जन्‍मदिन की तैयारियां पूरे जोरों से देशभर में चल रही हैं. हर बार की तरह...

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chhappan bhogहम सब के प्‍यारे नटखट नंदलाल, राधा के श्‍याम और भक्‍तों के भगवान श्रीकृष्‍ण के जन्‍मदिन की तैयारियां पूरे जोरों से देशभर में चल रही हैं. हर बार की तरह भक्तों ने धूमधाम से जन्माष्टमी मनाने के लिए लगभग सभी तैयारियां कर ली है. लेकिन इस बार श्री कृष्ण जन्माष्टमी दो दिन पड़ रही है. 2 सितंबर (रविवार) को रात 8 बजकर 48 मिनट पर अष्टमी तिथि लग रही है और ये 3 सितंबर (सोमवार) को अष्टमी तिथि 7 बजकर 19 मिनट पर समाप्त होगी.chhappan bhog

भक्तजन अपने प्रिय नन्द के लाला का पुरे दिन व्रत रखते हैं और दिन के अंत में अपने परम प्रिय कृष्ण की पूजा अर्चना और भोग के बाद अपने व्रत को खोलते हैं. इस दिन भगवान श्री कृष्ण को भक्तजन छप्पन भोग (Chhappan Bhog) लगाते हैं. भगवान को छप्पन भोग अति प्रिय है. क्या आप जानना चाहते हैं की छप्पन भोग (Chhappan Bhog) क्या है और भगवान को छप्पन भोग क्यूँ लगाया जाता है? इसके पीछे की कहानी क्या है और इसमें किन-किन आहारों को शामिल किया जाता है? तो चलिए आज हम बात करते है छप्पन भोग के बारे में ही.chhappan bhog

क्या है इसके पीछे की कहानी

इसके बारे में श्रीमद्भागवत महापुराण में एक कथा में बताया गया है की, ‘एक बार श्री कृष्ण के प्रेम में डूबी गोपिकाओं ने मास पर्यन्त यमुना में ब्रह्म मुहूर्त में स्नान किया. निरंतर एक माह तक स्नान करने वाली गोपियाँ भगवान श्री कृष्ण को वर रूप में पाना चाहती थी. एक महीने के उपरान्त सभी गोपियों ने मां कात्यायनी से वर चाहा कि उन्हें श्री कृष्ण ही पति के रूप में मिलें. अपने इस वर के बदले उन्होंने मां कात्यायनी को उद्दापन में छप्पन तरह के आहार देने की मन्नत मांगी थी. बस इसी के बाद से छप्पन भोग आस्तित्व में आया.

क्या क्या होता है छप्पन भोग (Chhappan Bhog) में-chhappan bhog

भगवान कृष्ण को लगने वाले छप्पन भोग में वह छप्पन आहार होते हैं जो उनको प्रिय हैं. इन छप्पन प्रकार के आहारों का विवरण इस प्रकार हैं-

  1. भक्त (भात),
  2. सूप (दाल),
  3. प्रलेह (चटनी),
  4. सदिका (कढ़ी),
  5. दधिशाकजा (दही शाक की कढ़ी),
  6. सिखरिणी (सिखरन),
  7. अवलेह (शरबत),
  8. बालका (बाटी),
  9. इक्षु खेरिणी (मुरब्बा),
  10. त्रिकोण (शर्करा युक्त),
  11. बटक (बड़ा),
  12. मधु शीर्षक (मठरी),
  13. फेणिका (फेनी),
  14. परिष्टश्च (पूरी),
  15. शतपत्र (खजला),
  16. सधिद्रक (घेवर),
  17. चक्राम (मालपुआ),
  18. चिल्डिका (चोला),
  19. सुधाकुंडलिका (जलेबी),
  20. धृतपूर (मेसू),
  21. वायुपूर (रसगुल्ला),
  22. चन्द्रकला (पगी हुई),
  23. दधि (महारायता),
  24. स्थूली (थूली),
  25. कर्पूरनाड़ी (लौंगपूरी),
  26. खंड मंडल (खुरमा),
  27. गोधूम (दलिया),
  28. परिखा,
  29. सुफलाढय़ा (सौंफ युक्त),
  30. दधिरूप (बिलसारू),
  31. मोदक (लड्डू),
  32. शाक (साग),
  33. सौधान (अधानौ अचार),
  34. मंडका (मोठ),
  35. पायस (खीर),
  36. दधि (दही),
  37. गोघृत (गाय का घी),
  38. हैयंगपीनम (मक्खन),
  39. मंडूरी (मलाई),
  40. कूपिका (रबड़ी),
  41. पर्पट (पापड़),
  42. शक्तिका (सीरा),
  43. लसिका (लस्सी),
  44. सुवत,
  45. संघाय (मोहन),
  46. सुफला (सुपारी),
  47. सिता (इलायची),
  48. फल,
  49. तांबूल,
  50. मोहन भोग,
  51. लवण,
  52. कषाय,
  53. मधुर,
  54. तिक्त,
  55. कटु,
  56. अम्ल.

नन्द के लाल को लगाए जाने वाले इस छप्पन भोग में ज्यादातर व्यंजन उनके प्रिय माने जाते हैं. जिन्हें छप्पन भोग कहा जाता है. तो इस बार अगर आप भी श्रीकृष्ण को लगाना चाहते हैं तो ऊपर दी लिस्ट को ध्यान में जरूर रखें.

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