देश के चुनावी इतिहास में पहली बार होगा 1 सीट के लिए 3 चरणों में चुनाव, जानें क्या है कारण

देश के चुनावी इतिहास में पहली बार होगा 1 सीट के लिए 3 चरणों में चुनाव, जानें क्या है कारण

लोकसभा 2019 के आम चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है. सात चरणों में होने वाले चुनावों में इस बार एक सीट ऐसी है जहाँ तीन चरणों में चुनाव होंगे. देश के...

बदला लेने के चक्कर में फिर मुंह की खाई पाकिस्तान ने, वायुसेना ने एफ-16 को मार गिराया
J&K: मात्र 24 घंटे में लिया सुरक्षा बालों ने कांस्टेबल सलीम की शहादत का बदला, ठोका 3 आतंकियों को
सरकार का बड़ा फैसला, इन इलाकों में बंद होगी whatsapp कॉलिंग, जानिये कौन से हैं वो क्षेत्र

लोकसभा 2019 के आम चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है. सात चरणों में होने वाले चुनावों में इस बार एक सीट ऐसी है जहाँ तीन चरणों में चुनाव होंगे. देश के चुनावी इतिहास में ऐसा पहली बार होगा. ये कश्मीर की अनंतनाग सीट है जहाँ तीन चरणों में चुनाव होंगे. अनंतनाग के हालात को देखते हुए यहां पर तीन चरणों में चुनाव होंगे. अगर अनंतनाग के हालात पर नजर डालें तो पता चलेगा कि यहां पर 3 चरणों में चुनाव क्‍यों कराया गया है.

इस मुख्य कारण यहाँ के मौजूदा हालात है. दक्षिणी कश्मीर में हिज्बुल मुजाहिदीन आतंकी बुरहान वानी की मौत से 2016 में घाटी में जो हिंसा और प्रदर्शनों का दौर जो उत्पन हुआ. इस स्‍थ‍िति‍ का पूरा फ़ायदा पाकिस्तान और पाकिस्तान के इशारों पर घाटी में आतंकवाद चलाने वालों ने उठाया. जानकारी के मुताबिक पिछले तीन वर्षों में कश्मीर में 580 से अधिक आतंकी दक्षिणी कश्मीर में मारे गए हैं.Lok Sabha elections 2019

अगर यहाँ के हालात की बात की जाये तो यहाँ मुठभेड़ स्‍थलों पर सैकड़ों पत्‍थरबाज सुरक्षाबलों के आंतक विरोधी अभियानों में बाधा डालने की कोशिश करते रहे. इससे निपटने में जो कार्रवाई हुई, उसमें पिछले तीन सालों में करीब 260 आम लोगों की मौत हुई. इसके अलावा पिछले 3 सालों में मारे गए आतंकियों में से 90 प्रतिशत यहाँ के स्थानीय युवा ही थे. आपको बता दें की दक्षिण कश्मीर का पुलवामा और शोपियां जिला आतंकियों का मुख्यालय माना जाता है.

आज दक्षिण कश्मीर के इन जिलों के हालात यह है की यहाँ 2016 के बाद अब तक इन जिलों में कोई भी बड़ी राजनीतिक रैली आयोजिन नहीं की गई है. हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान, इस क्षेत्र में  बहिष्कार देखा गया. उस दौरान हालात इतने खराब हो गए थे की अधिकारियों को पिछले साल अनंतनाग लोकसभा सीट के लिए उपचुनाव रद्द करने का फैसला लेना पड़ा. राज्य में यह पहली बार हुआ था जब महबूबा मुफ्ती राज्य की राजनीति में लौटने के बाद खाली हुए इस लोकसभा क्षेत्र पर उपचुनाव रद्द करने के लिए सरकार मजबूर हुई थी. क्‍योंकि दक्षिणी कश्मीर के मुकाबले कम प्रभावित सेन्ट्रल कश्मीर के लोकसभा क्षेत्र में हुए चुनावों में केवल 7% मतदान दर्ज हुआ था. Lok Sabha elections 2019

अब लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र सरकार का मानना है की अगर दक्षिण कश्मीर के इन आतंक प्रभावित जिलों में चुनाव के दौरान मतदान ना के बराबर या बहुत ही कम होता है तो ये आतंकियों और अलगाववादियों एक तरह से जीत होती है. इसी वजह से सरकार ने इस सीट के लिए 3 चरणों में चुनाव करवाने का फैसला लिया है. हालाँकि, राजनीतिक विशेषज्ञ सरकार के इस फैसले को सही नहीं मान रहे हैं.

COMMENTS

WORDPRESS: 0
DISQUS: 0