मौसम विभाग पर एफआईआर, किसानों को गलत पूर्वानुमान देने का आरोप

मौसम विभाग पर एफआईआर, किसानों को गलत पूर्वानुमान देने का आरोप

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के आधार पर हमें आने वाली आपदा का पहले से ही पता चल जाने के कारण हम सावधान हो जाते हैं जिससे कुदरत के कहर से कम से कम नुकसान ...

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मौसम विभाग के पूर्वानुमान के आधार पर हमें आने वाली आपदा का पहले से ही पता चल जाने के कारण हम सावधान हो जाते हैं जिससे कुदरत के कहर से कम से कम नुकसान हो पाता है. कई बार मौसम विभाग का पूर्वानुमान गलत भी साबित हो जाता है जिससे कुछ विशेष वर्ग को नुकसान भी उठाना पड़ जाता है. ऐसा ही मामला महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में सामने आया है.

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के एक गांव के किसानों ने भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाए कि बीज और कीटनाशक निर्माता कंपनियों की मिलीभगत से उसने मॉनसून के बारे में गलत पूर्वानुमान जताया. किसानों ने अपनी शिकायत में कहा है की पुणे और मुम्बई में विभाग के अधिकारियों ने कंपनियों के साथ ‘मिलीभगत’ की. इसी मिलीभगत के कारण वर्षा को लेकर मौसम विभाग ने किसानों को गलत पूर्वानुमान दिए.

परभनी ग्रामीण थाने में मंगलवार को दर्ज कराई गई शिकायत में किसानों ने आरोप लगाया की मौसम विभाग की ‘गलत’ सुचना को आधार मानकर किसानों ने खेतों में बुवाई की लेकिन मौसम विभाग के तमाम दावे खोखले साबित हुए और प्रदेश के किसानों को करोड़ों रूपए का नुकसान हुआ. इतना ही नहीं शिकायत में पिछले कई सालों के पूर्वानुमान के आंकड़े और क्षेत्र में हुई बारिश के आंकड़े बतौर सबूत पेश किये गए जिनमें दावा किया गया की मौसम विभाग की सुचना कई बार गलत साबित हुई.

स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के मराठवाड़ा क्षेत्र के अध्यक्ष मानिक कदम द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर भादंसं की धारा 420 के तहत आईएमडी निदेशक के खिलाफ ठगी के मामले दर्ज़ करवाए गए हैं. इससे पहले भी बीड जिले के एक किसान ने आईएमडी अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज़ करवाया था. किसानों का कहना है की आईएमडी अधिकारियों ने किसानों को यह कहते हुए गुमराह किया कि खरीफ मौसम के दौरान काफी बारिश होगी. शिकायतकर्ता जी. थावरे के अनुसार आईएमडी के पूर्वानुमान के आधार पर इलाके के किसानों ने बुवाई की लेकिन शुरुआत में एक बारिश होने के बाद फिर कोई बारिश नहीं हुई और बुवाई खटाई में पड़ गई.

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