मौत की घंटी: बहुत खतरनाक होता है मोबाइल रेडिएशन, ऐसे करें इसके दुष्प्रभावों की जांच

मौत की घंटी: बहुत खतरनाक होता है मोबाइल रेडिएशन, ऐसे करें इसके दुष्प्रभावों की जांच

मोबाइल फोन आज हमारी जिन्दगी का अहम हिस्सा बन गया है. बिना मोबाइल के आजकल कोई भी कार्य करना लगभग नामुकिन-सा हो गया है. मोबाईल के बिना जीवन की कल्पना कर...

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मोबाइल फोन आज हमारी जिन्दगी का अहम हिस्सा बन गया है. बिना मोबाइल के आजकल कोई भी कार्य करना लगभग नामुकिन-सा हो गया है. मोबाईल के बिना जीवन की कल्पना करें तो मनुष्य की पहुँच बहुत ही कम हो गई है. जब मोबाइल प्रचलन में नहीं थे तब सभी समय-समय पर परिवार वालों और रितेदारों से मिलने जाया करते थे. आज मोबाइल पर बात कर लेते है और अपने ही कार्य में लगे रहते हैं. वो भी इस हद तक की रात को सोते और सुबह उठते समय सबसे पहले मोबाइल चेक करते हैं. कहीं इस पर कोई नोटिफिकेशन और मैसेज तो नहीं आया है. सुबह सैर पर जाने की बजाय अपना समय मोबाइल पर लगा देते हैं. फिर डॉक्टर के चक्कर लगाने पड़ते हैं. शरीर की कसरत न होने से और मोबाइल पर लगे रहने से सेहत को दो गुना अधिक नुक्सान होता हैं.मोबाइल रेडिएशन

एक्सपर्ट्स के अनुसार, दिन भर मोबाइल पर बात करने से और चैट में बिजी रहने पर लोगों की प्रजनन क्षमता में भी बदलाव होने लगा हैं. मोबाइल और टॉवर से निकलने वाला रेडिएशन पुरुषों में स्पर्म काउंट कम करता है और महिलाओं में प्रजनन क्षमता कम होती है. आपकी जानकारी के बता दें की मोबाइल रेडिएशन से ब्रेन ट्यूमर का खतरा भी बढ़ता हैं. यदि आपके घर के नजदीक मोबाइल टावर है जिससे आपको रेडिएशन का डर है तो आप अब इससे संबंधित डिटेल tarangsanchar.gov.in पर जान सकते हैं.मोबाइल रेडिएशन

डब्ल्यूएचओ द्वारा की गई रिसर्च में बड़ा खुलासा हुआ है की मोबाइल रेडिएशन से कैंसर होने का खतरा है. हंगरी के वैज्ञानिकों के अनुसार जो लोग मोबाइल फोन का ज्यादा उपयोग करते थे, उनमें काउंट कम मिले है. वहीं दूसरी और जर्मनी की रिसर्च के अनुसार, जो लोग ट्रांसमिटर ऐंटेना के 400 मीटर के एरिया थे, उनमें कैंसर होने की आशंका तीन गुना अधिक मिली है. क्योंकि 400 मीटर के एरिया में ट्रांसमिशन बाकी एरिया से 100 गुना ज्यादा होता है.मोबाइल रेडिएशन

दूर संचार विभाग के डेप्युटी डायरेक्टर जनरल आर.एम. चतुर्वेदी का कहना है की यदि जानकारी के मिलने पश्चात भी फिर भी आप संतुष्ट नहीं हैं तो आप नाममात्र का फीस जमा करके दूर संचार विभाग की टीम को बुला सकते हैं. जिससे संपर्क के लिए साईट ऊपर दी गई है. जो आपके कमर के अंदर की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन के असली स्तर और आपके घर के अंदर तक की लोकेशन की जानकारी आपको देगी.मोबाइल रेडिएशन

मोबाइल रेडिएशन से सिरदर्द, सिर में झनझनाहट, थकान महसूस करना, चक्कर आना, डिप्रेशन, नींद न आना, आंखों में ड्राइनेस, काम में ध्यान न लगना, कानों का बजना, सुनने में कमी आना, मेमोरी लॉस, डाइजेशन में गड़बड़ी, अनियमित धड़कन, जोड़ों में दर्द जैसी विभिन्न समस्याएं हो सकती है.

जानकारों की माने तो हमारे शरीर में 70 फीसदी पानी है और दिमाग में भी 90 फीसदी तक पानी होता है. यह पानी धीरे-धीरे बॉडी रेडिएशन को अब्जॉर्ब करता है जो भविष्य में सेहत के लिए हानिकारक हो सकता हैं.मोबाइल रेडिएशन

रिसर्च के अनुसार, स्मार्टफोन का रेडिएशन लोगों की मेमोरी पर असर डालता है लेकिन जो लोग मोबाइल को Right हैंड या दाहिने कान के द्वारा यूज करते हैं उनकी मेमोरी पर इसका रेडिएशन ज्यादा बुरे प्रभाव डाल सकता है. इसके पीछे वजह भी है की दिमाग के दाहिने हिस्से में ही Figural मेमोरी होती है जो लोगों मे खास तौर पर तस्वीरें, पैटर्न और शेप्से की पहचान और समझने की क्षमता प्रदान करती है. ऐसे में स्मार्टफोन का यह रेडिशन फिगरल मेमोरी को सबसे ज्यादा हानि पहुंचा सकता हैं. अपने फोन के रेडिएशन अर्थात् शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में जानने के लिए आप फोन पर *#07# डायल कर सकते है.

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