नहीं रहे पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस, हिन्दू रीति-रिवाज से होगा अंतिम संस्कार

नहीं रहे पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस, हिन्दू रीति-रिवाज से होगा अंतिम संस्कार

पूर्व रक्षा मंत्री और समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता जॉर्ज फर्नांडिस अब इस दुनिया में नहीं रहे. लम्बी बीमारी के बाद मंगलवार सुबह सात बजे उन्होंने नई द...

दूध उत्पादकों के लिए खुशखबरी, दूध की कीमतों में फिर होगी बढ़ोतरी
बिल्लियों से परेशान हुए कर्नाटक के राज्यपाल, पकड़ने वाले को देंगे 1 लाख रुपये
विजय माल्या के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी,मुंबई की इस जेल में बीतेंगी उसकी रातें, बैरक तैयार

पूर्व रक्षा मंत्री और समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता जॉर्ज फर्नांडिस अब इस दुनिया में नहीं रहे. लम्बी बीमारी के बाद मंगलवार सुबह सात बजे उन्होंने नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर अंतिम साँस ली. 88 वर्षीय जॉर्ज फर्नांडिस पिछले कुछ दिनों से स्वाइन फ्लू से पीड़ित थे और उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती भी करवाया गया था. उनके के निधन के बाद पीएम मोदी उनके आवास पर उन्हें श्रद्धांजली देने पहुंचे. मोदी ने उनकी बीवी लैला कबीर से मिले और संवेदना जाहिर की.George Fernandes

समता पार्टी की पूर्व अध्यक्षा रही जया जेटली ने कहा की उनका अंतिम संस्कार किया जायेगा. उन्होंने कहा की उनकी इच्छा भी यही थी की उनका दाह-संस्कार किया जाये. हालाँकि, उन्होंने ये भी कहा कि अपने अंतिम दिनों में वे चाहते थे कि उनके पार्थिव शरीर को दफनाया जाये. इसलिए पहले हम उनका दाह संस्कार करेंगे उसके बाद राख को दफनाया जायेगा, ताकि उनकी दोनों इच्छा पूरी हो जाये. उन्होंने बताया था कि कल उनके बेटे के आने के बाद उनका अंतिम संस्कार किया जायेगा.

पीएम मोदी से पहले रक्षामत्री निर्मला सीतारमण उनको श्रद्धांजलि देने एम्स पहुंची. वहां वे फर्नांडिस की पत्नी लैला कबीर से मिलीं. तेजतर्रार मजदूर नेता और समाजवादी जॉर्ज फर्नांडिस उन चंद राजनेताओं में से एक थे जिन्होंने जाति, धर्म और क्षेत्रीय पहचान से ऊपर उठ राष्ट्रीय राजनीति पर एक अमिट छाप छोड़ी.George Fernandes

आपको बता दें कि 3 जून 1930 को कर्नाटक में जन्मे जॉर्ज फर्नांडिस 10 भाषाओं के जानकार थे. वह हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, मराठी, कन्नड़, उर्दू, मलयाली, तेलुगु, कोंकणी और लैटिन भाषा के अलावा कई स्थानीय भाषाओँ के भी जानकार थे. उनकी मां किंग जॉर्ज फिफ्थ की बड़ी प्रशंसक थीं. उन्हीं के नाम पर अपने छह बच्चों में से सबसे बड़े का नाम उन्होंने जॉर्ज रखा था. इमरजेंसी के दौरान गिरफ्तार हुए जॉर्ज फर्नांडिस तिहाड़ जेल में कैदियों को गीता के श्लोक सुनाते थे. 1974 की रेल हड़ताल के बाद वह कद्दावर नेता के तौर पर उभरे और उन्होंने बेबाकी के साथ इमरजेंसी लगाए जाने का विरोध किया.

 

COMMENTS