अगर करते हैं नशा तो हो जाएं सावधान, टूट सकती है आपकी सगाई

अगर करते हैं नशा तो हो जाएं सावधान, टूट सकती है आपकी सगाई

नशा एक सामाजिक बुराई है, नशेड़ी व्यक्ति की नशा करने की आदत से उसका परिवार ही नहीं समाज भी प्रभावित होता है. आज के समय में इस बुराई से निपटने के लिए बहु...

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नशा एक सामाजिक बुराई है, नशेड़ी व्यक्ति की नशा करने की आदत से उसका परिवार ही नहीं समाज भी प्रभावित होता है. आज के समय में इस बुराई से निपटने के लिए बहुत सी समाजसेवी संस्थाएं और समाजसेवी लोग अपना भरपूर योगदान दे रहे हैं और समाज को एक अच्छी दशा व दिशा देने के लिए कई लोग समाज हित में अच्छे फैसले भी लेते हैं. इसी का एक उदहारण मध्य प्रदेश के आदिवासी समाज में देखने को मिला है.

प्रदेश के श्योपुर इलाके में आदिवासी समाज ने युवाओं में बढ़ रहे नशे के प्रचलन को ध्यान में रखते हुए समाज को शराब और जुआ जैसी बुरी आदतों से मुक्त रखने के लिए महापंचायत कर नशे के खिलाफ कठोर कदम उठाने का निर्णय लिया है. श्योपुर के बग्वाज गाँव में आदिवासी समाज की महापंचायत 18 मार्च को होनी निश्चित हुई है जिसमें जुआ और शराब की लत वाले परिवारों और युवाओं की शादी को रोकने सम्बन्धी फैसला लिया जायेगा.

आदिवासी समाज के सतीश कुमार ने एक प्रतिष्ठित अखबार से बातचीत करते हुए बताया कि, ‘समाज ने यह निर्णय नशाखोरी और जुआ जैसी बुरी लत छुड़वाने हेतु लिया है, निर्णय के मुताबिक जब तक गाँव का प्रधान या सरपंच अथवा मुखिया यह लिखकर नहीं देगा कि अमुक युवक किसी प्रकार का नशा नहीं करता है और ना ही कोई ओर व्यसन करता है तब तक उसकी सगाई तय नहीं हो पायेगी.’ सतीश ने कहा कि हमारा मकसद है कि समाज में कोई व्यसन ना करे, हम इस प्रकार की बुराई को जड़ से मिटाना चाहते हैं ताकि एक सुन्दर और स्वस्थ समाज का निर्माण हो.

आदिवासी समाज बाकायदा इस नियम का उल्लंघन करने वाले को दण्डित भी करेगा. पंचायत के सदस्यों का कहना है कि जो भी परिवार पंचायत के निर्णय की अवमानना करेगा उसे समाज से बहिष्कृत करने के बारे में महापंचायत में चर्चा की जाएगी. आपको बता दें कि आदिवासी समाज की महापंचायतों ने इससे पहले तुगलकी फरमान भी जारी किये थे जिसका चारों ओर जमकर विरोध हुआ था. लेकिन इस फैसले को समाज हित में अच्छी पहल माना जा रहा है.

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