ड्रेगन की दादागिरी उसे ले बैठी, राखी के त्यौहार पर बहनें निकाल देगी चीन का दिवाला

ड्रेगन की दादागिरी उसे ले बैठी, राखी के त्यौहार पर बहनें निकाल देगी चीन का दिवाला

अब बहनें तोड़ेगी चीन की कमर

7 अगस्त को रक्षाबंधन का त्यौहार है,लेकिन बाज़ार में आजकल वो रौनक दिखाई नही दे रही जो आमतौर पर होनी चाहिए थी. जी एस टी के प्रभाव को छोड़ दें तो भी राखी ज...

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राखी7 अगस्त को रक्षाबंधन का त्यौहार है,लेकिन बाज़ार में आजकल वो रौनक दिखाई नही दे रही जो आमतौर पर होनी चाहिए थी. जी एस टी के प्रभाव को छोड़ दें तो भी राखी जैसे प्रमुख त्यौहार पर बाजारों की रौनक अब फीकी नज़र आ रही है. दिवाली और होली पर चाइना के सामान के विरुद्ध चले कैंपेन भी इसका कारन माने जा सकते है. लोगों में अब चाइना में बने सामान के उतनी दिलचस्पी नही है पहले जो बाज़ार चीनी सामान से अट्टे पड़े होते थे वहीँ अब दुकानदार चीनी सामान की खरीददारी में उतना INTERAST नहीं दिखा रहे है. ना ही अब दुकानों में चीनी सामानों को लेती भीड़ नज़र आ रही है.राखी
और दोक्लाम विवाद के बाद रक्षाबंधन के इस पावन मौके पर चीन में बनी राखियों का बहिष्कार भी लोगों के दिलो दिमाग में छाया हुआ है. लोग तरह तरह से छोटे से लेकर बड़े लेवल तक चीनी सामान ना खरीदने की अपील कर रहे है. चीन के इस मूर्खतापूर्ण कदम ने अपने ही व्यवसायिओं के धंधे पर कुल्हाड़ी मारी है. दिवाली और होली के बाद इस तरह चीनी माल की इस बार भी उपेक्षा चीन को महँगी पड़ने वाली है कई दुकानदारों ने तो अपने यहाँ चीनी सामान नही मिलने के लेबल और बोर्ड तक लगा दिए है. विशेषज्ञों का मानना है की चीन में बने सामान की मांग काफी कम हुई है,लेकिन साथ ही अफ़सोस भी है की आज भी हम कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर है.आज बेशक राखियाँ भारत में बनी ज्यादा बिक रही हो परन्तु कच्चा माल सारा चाइना से ही आता है.
बहनों के इस त्यौहार में बहने भी चाइना की कमर तोड़ने में कोई कोर कसर नही छोड़ना चाहती. ज्यादातर महिलाओं का मानना है की वो बॉर्डर पर तो नही जा सकती परन्तु घर बैठे ही चीन की चीनी राखियों की खरीद ना करके भी चीन पर हमला कर सकती है व करेगी भी.वो सादे सूत और रोली मौली और कच्चे धागे से बनी देशी राखी ही इस्तेमाल करेंगी.
खैर जो भी हो, आखिर लोगों के दिमाग में विदेशी वस्तुओं के उपयोग ना करने का संकल्प घर करने लगा है जो भविष्य में देश की विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता ख़तम करेगा व देश को स्वावलंबी बनाने में मददगार साबित होगा.

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