दशहरा स्पेशल: जानिए रावण के बारे में हैरान कर देने वाली रोचक जानकारी

दशहरा स्पेशल: जानिए रावण के बारे में हैरान कर देने वाली रोचक जानकारी

हर साल दशहरा का पर्व हर्षोल्लास के साथ पुरे देश में और विदेशों में भी मनाया जाता है. साल दर साल रावण का दहन किया जाता है. सालों से चली आ रही इस परम्पर...

अमृतसर ट्रेन हादसा: मातम में बदला उल्लास का पर्व दशहरा, पांच सेकंड में लील ली 61 जिंदगियां
दिवाली पर पटाखों की बिक्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दिया ये आदेश
दिवाली की रात जरुर करें ये ख़ास टोटके, माँ लक्ष्मी की कृपा से साल भर बरसेगा अपार धन

हर साल दशहरा का पर्व हर्षोल्लास के साथ पुरे देश में और विदेशों में भी मनाया जाता है. साल दर साल रावण का दहन किया जाता है. सालों से चली आ रही इस परम्परा को हम भी साल दर साल आगे बढ़ाते जा रहे हैं. लेकिन ये अंदर का जो रावण है, सुधरने का नाम ही नहीं ले रहा. हर साल की तरह इस बार भी बुराई के प्रतीक रावण रुपी राक्षस को जलाया जायेगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रावण का पुतला क्यों जलाया जाता है?रावण के बारे में

नि:संदेह, रावण एक बुरा राक्षस था, जिसने धोखे से एक पराई स्त्री का अपहरण किया, जिसका फल भी उसे भुगतना पड़ा. लेकिन रावण में कुछ अच्छाईयां भी थी जिन्हें हम या तो शायद जानते नहीं या फिर जानबूझकर अनजान बन रहे हैं. क्या आप जानते हैं कि रावण के गुणों की वजह से कई जगहों पर उसकी पूजा भी की जाती है.

रावण के बारे में सबसे ज्यादा ‘रामचरित मानस’ में गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है, जिन्होंने अपनी लेखनी में उसे भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त लिखा है. तुलसीदास जी के हिसाब से भी रावण में काफी अच्छे गुण भी थे, जिन्हें लोगों को जानना बहुत जरूरी है. कहा जाता है कि रावण एक ने अपनी बहन के अपमान का बदला लेने के लिए ये जानते हुए भी कि प्रभु श्री राम साक्षात् उसका काल है, अपने कर्तव्य का पालन करते हुए उस पर आखिर तक डटा रहा.

तुलसीदास जी के अनुसार दैत्यराज रावण एक कुशल राजनीतिज्ञ, सेनापति और वास्तुकला का मर्मज्ञ होने के साथ-साथ बहुत सी विद्याओं का ज्ञाता, उसे विद्या का महत्व पता था और वो एक राक्षस होते हुए भी एक पूर्ण विद्वान था. रावण को सभी वेद और पुराण कंठस्थ थे. रावण को लोग बहुत बढ़िया कवि कहते थे, उसने कई रचनाएं भी लिखी हैं.रावण के बारे में

रावण के बारे में कहा जाता है कि रावण टोने-टोटके से लेकर इंद्रजाल, तंत्र-मंत्र-यंत्र का पूर्ण ज्ञाता, सम्मोहन और तरह-तरह के जादू जानता था, यही नहीं रावण बहुत बड़ा पंडित था और इसी कारण भगवान राम ने उससे विजय यज्ञ करवाया थ. इसके अलावा आयुर्वेद, तंत्र और ज्योतिष का ज्ञाता था रावण. रावण ने तांडव स्तोत्र, अंक प्रकाश, इंद्रजाल, कुमारतंत्र, प्राकृत कामधेनु, प्राकृत लंकेश्वर, ऋग्वेद भाष्य, रावणीयम, नाड़ी परीक्षा आदि पुस्तकों की रचना की थी. पौराणिक ग्रंथों में वर्णन भी है कि रावण को कई भाषाओं का ज्ञान भी था. लेकिन अपने बुरे कर्मों और अहंकार की वजह से की वजह से वह खुद मारा गया, पुरे वंश का खात्मा कर दिया और लंका नगरी को तबाह होने में जरा भी देर नहीं लगी. नि:संदेह, इसके पीछे रावण का अहं ही था जिसकी वजह से उसका अंत हुआ.