सावन में ऐसे करें भोलेनाथ को प्रसन्न, सम्पूर्ण व्रत विधि एवं मुहूर्त

सावन में ऐसे करें भोलेनाथ को प्रसन्न, सम्पूर्ण व्रत विधि एवं मुहूर्त

देवाधिदेव महादेव को हिन्दु धर्म ही नहीं अपितु कई धर्मों में बड़ी आस्था के साथ माना जाता है. भोलेनाथ को सबसे जल्दी खुश होने वाला देव भी माना जाता है. कह...

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देवाधिदेव महादेव को हिन्दु धर्म ही नहीं अपितु कई धर्मों में बड़ी आस्था के साथ माना जाता है. भोलेनाथ को सबसे जल्दी खुश होने वाला देव भी माना जाता है. कहा जाता है की अगर कोई भक्त पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान् शिव की आराधना करता है तो प्रभु उस मनुष्य का कल्याण करते हैं. साल में एक सावन का महिना ऐसा आता है जब सारा देश ही शिवमय हो जाता है. भक्तजन सारा दिन भगवान भोलेनाथ का नाम जपते रहते हैं.

शिवरात्रि व्रत परम मंगलमय और दिव्यतापूर्ण है. कहते हैं की इस दुनिया में अनेकोंनेक व्रत और त्यौहार है लेकिन शिवरात्रि के व्रत की बराबरी कोई नहीं कर सकता. इससे सदा सर्वदा भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती है. यह शिव रात्रि व्रत व्रतराज के नाम से विख्यात है एवं चारों पुरूषार्थो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला है. हो सके तो इस व्रत को जीवन पर्यंत करें नही तो चौदह वर्ष के बाद पूर्ण विधि विधान के साथ उद्यापन कर दें. अगर किसी कारणवश इसे 14 वर्षों तक भी नहीं किया जा सकता तो जब भी संभव हो, किसी भी शिवरात्रि को व्रत रखा जा सकता है.

धर्म ग्रन्थों के अनुसार सावन का महिना बहुत ही पवित्र और शुभ होता है. विभिन्न धर्म ग्रंथो में सावन के दिनों को शुभ और पवित्र माना गया हैं. सावन का महिना महादेव को समर्पित करके आराधना करना और व्रत रखना शुभ माना जाता हैं. श्रावण में शिवरात्रि व्रत को फाल्गुन माह की शिवरात्रि की तरह ही मनाया जाता हैं. शिवरात्रि व्रत से पहले दिन अर्थात त्रयोदशी तिथि के दिन मात्र एक ही बार भोजन का सेवन करते हैं जिसके पश्चात शिवरात्रि के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करके भगवान शिव के मंदिर पहुंचकर उनकी पूजा और अभिषेक करते है.

पूजा पाठ के बाद भक्त पुरे दिन उपवास करने का निर्णय लेते हैं और पारण अगले दिन करते हैं. काफी लोगों के द्वारा शिवरात्रि के दिन रात्रि में ही व्रत का पारण कर लेते है. शिवरात्रि व्रत के दिन दूसरा स्नान सायंकाल में शिव पूजा से पहले अनिवार्य रूप से किया जाता हैं. इस बार शिवरात्रि 9th अगस्त 2018, वीरवार को मनाई जाएगी. निशीथ काल में पूजा का सही समय रात्रि 24:05+ से 24:48+ तक बनता है मुहूर्त की कुल अवधि 43 मिनट की है. व्रत पारण का समय सुबह 5 बजकर 52 मिनट से लेकर दोपहर बाद 15 बजकर 44 मिनट तक (10 अगस्त 2018) है. आपको बता दें की 9 अगस्त 2018 को चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ रात्रि 22 बजकर 45 मिनट पर होता है और चतुर्दशी तिथि का समापन 10 अगस्त 2018 को सायं 19 बजकर 07 मिनट पर होगा.