एसबीआई 12 दिसम्बर से बंद करने जा रहा है अपनी एक और सर्विस, करोड़ों ग्राहक होंगे प्रभावित

एसबीआई 12 दिसम्बर से बंद करने जा रहा है अपनी एक और सर्विस, करोड़ों ग्राहक होंगे प्रभावित

पिछले कई दिनों से बैंकिंग सिस्टम में कई अहम बदलाव किये जा रहे हैं. हाल ही में एसबीआई ने अपनी चार सर्विस बंद की थी, इसके बाद SBI एक और बड़ा बदलाव करने ज...

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पिछले कई दिनों से बैंकिंग सिस्टम में कई अहम बदलाव किये जा रहे हैं. हाल ही में एसबीआई ने अपनी चार सर्विस बंद की थी, इसके बाद SBI एक और बड़ा बदलाव करने जा रहा है. हालाँकि, जिस नियम में एसबीआई 12 दिसम्बर को बदलाव करने जा रहा है उस नियम में HDFC, ICICI, पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ़ बड़ौदा अगले साल की शुरुआत में बदलाव करेंगे.एसबीआई

SBI की तरफ से इस नियम के बदलाव से उन सभी कस्टमर्स पर असर पड़ेगा जो लेन-देन के लिए चेक का उपयोग करते हैं. इसके लिए RBI ने सभी बैंकों को निर्देश दिया हुआ है की अगले साल की शुरुआत से ही नॉन-CTS चेक (चेक ट्रांजेक्शन सिस्टम) को क्लीयर नहीं किये जायेंगे. इस बाबत एसबीआई की तरफ से 12 दिसम्बर की डेडलाइन तय की गई है. इस हिसाब से 12 दिसम्बर से देश का सबसे बड़ा बैंक SBI नॉन-CTS चेक स्वीकार नहीं करेगा.

SBI की तरफ से इस नियम को लागू करने के बाद सिर्फ CTS चेक ही भुगतान के लिए स्वीकार किये जायेंगे. जबकि कुछ बैंकों में यह नियम 1 जनवरी 2019 से लागू होगा. आपको बता दें कि RBI की तरफ से इस बारे में तीन महीने पहले ही निर्देश दे दिया गया था. इसे लेकर SBI की तरफ से अपने करोड़ों ग्राहकों को मैसेज भी भेजे जा रहे हैं. बैंक की तरफ से भेजे जा रहे मैसेज में बैंक के ग्राहकों से चेक बुक सरेंडर करने और नई चेक बुक जारी करने की अपील की गई है. CTS यानी चेक ट्रांजेक्शन सिस्टम, इस सिस्टम के तहत चेक की इलेक्ट्रॉनिक इमेज कैप्चर हो जाती है और फिजिकल चेक को क्लीयरेंस के लिए एक बैंक से दूसरे बैंक में भेजने की आवश्यकता नहीं होती.एसबीआई

RBI ने नए नियम के बारे में बताते हुए कहा की इसके लागू होने के बाद चेक को फिजिकली भेजने का झंझट ही खत्म हो जायेगा. जिससे इससे समय और खर्च में कमी आएगी. इसके अलावा चेक क्लीयरेंस में भी कम समय लगता है. आपको बता दें नॉन सीटीएस चेक को कंप्यूटर रीड नहीं कर पाता. इसलिए इन्हें फिजिकली एक ब्रांच से दूसरी ब्रांच में भेजा जाता है. इसी कारण चेक को ड्रॉप-बॉक्स में लगाने के बाद इसकी क्लीयरेंस में ज्यादा समय लगता है. RBI बैंकों को पहले भी यह निर्देश दे चुका है कि वे केवल CTS-2010 स्टैंडर्ड चेक वाली चेकबुक ही इश्यू करें.

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