SC का बड़ा फैसला- बिना बीमा वाला वाहन अगर हो गया एक्सीडेंट, तो नीलाम करके चुकाना होगा हर्जाना

SC का बड़ा फैसला- बिना बीमा वाला वाहन अगर हो गया एक्सीडेंट, तो नीलाम करके चुकाना होगा हर्जाना

सुप्रीम कोर्ट ने गुरूवार को बड़ा आदेश देते हुए कहा है की अगर किसी वाहन का बीमा खत्म हो चुका है और उससे एक्सीडेंट हो जाता है तो प्रभावित व्यक्ति को उस ग...

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरूवार को बड़ा आदेश देते हुए कहा है की अगर किसी वाहन का बीमा खत्म हो चुका है और उससे एक्सीडेंट हो जाता है तो प्रभावित व्यक्ति को उस गाडी को बेचकर हर्जाना चुकाया जाना चाहिए.  सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों को मोटर वाहन अधिनियम में संसोधन करने का आदेश दिया है. कोर्ट का कहना है की इस व्यवस्था की अनिवार्य बनाया जाना चाहिए.बीमा

इससे पहले शीर्ष अदालत ने सभी ऑटो कंपनियों को आदेश दिया था की वे अनिवार्य थर्ड पार्टी बीमा के बिना कोई वाहन ना बेचें. यह व्यवस्था हाल ही में 1 सितम्बर को लागू की गई है. इस व्यवस्था के बाद नए चार पहिया वाहनों का पंजीकरण करवाते समय कम से कम दो साल का थर्ड पार्टी बीमा अनिवार्य कर दिया गया है जबकि दुपहिया वाहनों के लिए इसे 5 साल के लिए कर दिया गया है.

कोर्ट ने यह फैसला दिनोंदिन बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं के मद्देनज़र लिया है. क्योंकि लोग गाड़ी लेने के बाद नई गाड़ी का बीमा तो करवा लेते हैं लेकिन बाद में उसे रिन्यू नहीं करवाते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा पर अदालती कमेटी की सिफारिशों का उल्‍लेख करते हुए यह नियम अनिवार्य किया है. कमेटी ने सिफारिश की थी कि दोपहिया या चौपहिया वाहनों की बिक्री के समय थर्ड पार्टी इंश्‍योरेंस कवर एक साल की जगह क्रमश: 5 साल और 2 साल के लिए अनिवार्य किया जाए. सिर्फ 45 फीसदी बाइक व स्‍कूटर ही बीमित हैं जबकि 70 फीसदी कार इंश्‍योर्ड हैं.बीमा

इस मामले की सुनवाई के दौरान जब बीमा कंपनियों ने इस पर ऐतराज जताया तो कोर्ट ने उन्हें भी फटकार लगाते हुए कहा कि लोग सड़क दुर्घटनाओं में मर रहे हैं. एक आंकड़े के मुताबिक हर साल सड़क दुघर्टना में एक लाख से ज्यादा मौत हो जाती है. औसत रूप में हर तीन मिनट में एक दुर्घटना होती है. लोग मर रहे हैं और आप कह रहे हैं कि उन्हें मरने दिया जाए. अदालत ने टिप्पणी की, ‘आप उनको देखिए, वह सड़क दुर्घटना में मर रहे है. भारत की जनता मर रही है. उनके लिए और बेहतर करिए.’

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