शरद पूर्णिमा: आज की रात आसमान से बरसेगा अमृत, जानिए क्या है इस रात्रि की खीर का रहस्य

शरद पूर्णिमा: आज की रात आसमान से बरसेगा अमृत, जानिए क्या है इस रात्रि की खीर का रहस्य

साल में 12 पूर्णिमा आती है लेकिन इन सबमें शरद पूर्णिमा ख़ास मानी जाती है. कहा जाता है की इस दिन कामदेव और रति का जादू प्रकृति पर सर्वत्र छाया नजर आता ह...

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साल में 12 पूर्णिमा आती है लेकिन इन सबमें शरद पूर्णिमा ख़ास मानी जाती है. कहा जाता है की इस दिन कामदेव और रति का जादू प्रकृति पर सर्वत्र छाया नजर आता है. साधु, गृहस्थ, युवा, बूढ़े नई ऊर्जा से भरे होते हैं. प्रथम पूज्य गणेश नृत्य गणपति बन देवता, मनुष्य, पशु-पक्षी सबके साथ मधुर संगीत की सुर-ताल के बीच मस्ती में नाच रहे होते हैं.शरद पूर्णिमा

इस दिन सारी सृष्टि राधा-कृष्णमय होती है. चंद्र देव अपनी 27 पत्नियों- रोहिणी, कृत्तिका आदि नक्षत्रों के साथ अपनी पूरी कलाओं से भरे इस रात सभी को तृप्त करने में जुट जाते हैं. शरद पूर्णिमा की रात राधा-कृष्ण महारास में मग्न हो जाते हैं. मान्यता है की इस रात्रि पूरी रात जागते हुए एकाग्रचित मन से ईश्वर की आराधना की जाए तो सभी मनोकामना पूर्ण होकर व्यक्ति सर्वसुख संपन्न हो जाता है.

इस शरद पूर्णिमा रात्री को गाय के दूध से बनी खीर या दूध छत पर रखने का प्रचलन है. मान्यता है कि चंद्र देव द्वारा बरसाई जाने वाली चांदनी, खीर या दूध को अमृत से भर देती है. एक मान्यता के अनुसार लंकापति रावण भी इसी रात्रि को ही अपनी नाभि पर चंद्रमा की किरणों को लेकर पुन: शक्तिशाली होता था.शरद पूर्णिमा

हमारे मन के स्वामी चंद्र देव को माना गया है, इसलिए इस रात्रि चंद्रमा की पूजा करने का विधान भी कहा गया है. जिसमें उन्हें पूजा के अंत में अर्घ्य भी दिया जाता है. शरद पूर्णिमा के बाद से हेमंत ऋतु शुरू होती है. लक्ष्मी के भाई चंद्रमा इस रात पूजा-पाठ करने वालों को शीघ्रता से फल देते हैं.

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