आपको कभी भविष्य में टीबी होगी या नहीं? पहले ही बताएगा ये टेस्ट, वैज्ञानिकों ने खोजी नई तकनीक

आपको कभी भविष्य में टीबी होगी या नहीं? पहले ही बताएगा ये टेस्ट, वैज्ञानिकों ने खोजी नई तकनीक

टीबी का नाम सुनते ही शरीर में सिहरन सी दौड़ जाती है, दौड़े भी क्यूँ नहीं? जरा सी लापरवाही या इलाज में देरी रोगी के लिए जानलेवा साबित हो सकती है. विश्व स...

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टीबी का नाम सुनते ही शरीर में सिहरन सी दौड़ जाती है, दौड़े भी क्यूँ नहीं? जरा सी लापरवाही या इलाज में देरी रोगी के लिए जानलेवा साबित हो सकती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन और सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद देश में टीबी के मरीजों की संख्या में हर साल इजाफा हो रहा है.

टीबी यानी ट्युबरक्यूलोसिस को लेकर वैज्ञानिकों ने एक नई तरह की रक्त जांच का पता लगाया है जिसकी सहायता से अधिक जोखिम वाले रोगियों में ‘टीबी’ की शुरुआत से दो साल पहले तक पता लगाया जा सकता है. इस तकनीक के इस्तेमाल से रोगी के टीबी ग्रस्त होने से पहले ही पता लगाकर उसका निदान किया जा सकेगा. इस प्रक्रिया में चूँकि रोगी के पास समय होता है जिससे उस बीमारी का उचित निराकरण पहली स्टेज पर ही कर दिया जायेगा.

अमेरिकन जर्नल ऑफ रेस्पीरेटरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसीन में छपे एक अध्ययन के मुताबिक एक्टिव टीबी से ग्रसित रोगियों में इसके होने की संभावनाएं ज्यादा होती है. अधिकतर मामलों में टीबी से संक्रमित रोगियों में से इसके होने की सम्भावना बीस प्रतिशत तक होती है.

वैज्ञानिकों की टीम ने जो रक्त जांच की नई तकनीक इजाद की है दरअसल उसमें उन चार जीन के स्तर को मापा जाता है जो अधिक जोखिम वाले रोगियों में टीबी के विकास का अनुमान लगाता है. स्टेलेनबोश विश्वविद्यालय (दक्षिण अफ्रीका) के गेरहर्ड वालजल ने कहा की रोग होने के पहले रक्त में मौजूद चार जीन के संयोजन की माप के जरिये ये पता लगाना आसान हो जाता है कि निकट भविष्य में उस व्यक्ति के टीबी के संक्रमण की सम्भावना है जिसका टेस्ट किया गया है.

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